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महाकाल मंदिर में 3 अप्रैल से सतत जलाभिषेकः दो माह तक ‘गलंतिका’ से अर्पित होगी शीतल जलधारा

गर्मी के इस मौसम में बाबा महाकाल पर सतत जलाभिषेक की यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का भी संदेश देती है।

By: Naredra 
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महाकाल मंदिर में 3 अप्रैल से सतत जलाभिषेकः दो माह तक ‘गलंतिका’ से अर्पित होगी शीतल जलधारा

उज्जैनः श्री महाकालेश्वर मंदिर में गर्मी के मौसम को देखते हुए विशेष परंपरा की शुरुआत होने जा रही है। 3 अप्रैल से भगवान महाकाल पर सतत जलाभिषेक किया जाएगा।

वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक, यानी 3 अप्रैल से 29 जून तक, भगवान श्री महाकालेश्वर पर ‘गलंतिका’ के माध्यम से निरंतर जलधारा अर्पित की जाएगी। इसके लिए 11 मिट्टी के कलशों का उपयोग किया जाएगा, जिनमें देश की पवित्र नदियों—गंगा, यमुना, नर्मदा, क्षिप्रा सहित अन्य नदियों का स्मरण कर जल स्थापित किया जाएगा। यह जलाभिषेक प्रतिदिन प्रातः भस्मारती के बाद शुरू होकर शाम तक जारी रहेगा।

मंदिर परंपरा के अनुसार, भीषण गर्मी के दौरान भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए यह विशेष व्यवस्था की जाती है। इस दौरान रजत अभिषेक पात्र के साथ ‘गलंतिका’ बांधी जाती है, जिससे लगातार जलधारा बहती रहती है।

शासकीय पुजारी घनश्याम शर्मा के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम मास होने के कारण एक माह अतिरिक्त जलाभिषेक किया जाएगा, जिससे यह आयोजन और भी विशेष बन गया है।

 

उज्जैन से संवाददाता प्रियंक की रिपोर्ट

 

 

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