भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से प्रभावित 42 मोहल्लों में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। गैस पीड़ित संगठनों ने एक जांच रिपोर्ट जारी करते हुए आरोप लगाया है कि कई प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए पहुंच रहा पानी साफ नहीं है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ सकता है।
भोपाल गैस पीड़ित संगठनों की ओर से इंडियन कॉफी हाउस, पुलिस लाइन, लिली टॉकीज में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान जल आपूर्ति से जुड़ी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पानी की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई।
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना ढींगरा ने आरोप लगाया कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास बसे प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर सप्लाई होने वाला पानी गंदा है, जिससे स्थानीय लोगों की सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है।
गैस पीड़ित संगठनों का कहना है कि यूनियन कार्बाइड परिसर में मौजूद जहरीले कचरे के कारण आसपास के कई इलाकों का भूजल लंबे समय से प्रभावित है। इसी समस्या को देखते हुए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पाइपलाइन व्यवस्था की गई थी, लेकिन अब उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

संगठनों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2005 और 2012 में प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। उनका आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी है।
गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित मोहल्लों में पेयजल की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि लंबे समय से प्रदूषण की समस्या झेल रहे इलाकों में पानी की गुणवत्ता एक गंभीर मुद्दा है। अब जल आपूर्ति को लेकर उठे सवालों के बाद प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।