रिपोर्ट: सत्यम दुबे
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों काफी गहमा-गहमीं है, हो भी क्यों न अगले साथ सूबे में विधानसभा चुनाव भी तो होने हैं। सूबे में सियासत गर्म होने के साथ ही बीजेपी में भी काफी अंदरुनी कलह की स्थिति बनी हुई है। इन सब के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा की बात को एक सिरे से खारिज कर दिया है। सीएम ने बताया कि जब वह सांसद थे तब भी उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी और आज भी नहीं है। उन्होने अपने आम को बीजेपी का आम सैनिक बता रहे हैं। पिछले दिनों यूपी की सियासत में तेज हलचल के पीछे योगी आदित्यनाथ की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को भी वजह माना जा रहा था।
सीएम योगी ने एक सामाचार पत्र से बातचीत करते हुए कहा कि ‘जब मैं सांसद था तब मेरी कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी। आज भी मेरी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह एक आम सैनिक हैं जो बीजेपी के विजन और विकास, सुरक्षा व समृद्धि के लिए पीएम मोदी के कैंपेन पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार के पिछले चार वर्षों की उपलब्धियां हैं, उससे ज्यादा खुशी और नहीं हो सकती।’
इसके साथ ही योगी ने आगे कहा है कि उनका फोकस अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर है जिसमें उन्होंने बीजेपी के दो तिहाई वोटों से जीतने का दावा किया है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा होने लगी कि सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी हाई कमान के बीच तकरार काफी बढ़ गई है। इसका कारण योगी आदित्यनाथ की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा बताई गई।
वहीं इस तकरार पर राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि यूपी की सियासत का असर केंद्र तक है। 80 सांसदों को दिल्ली भेजने वाले राज्य के सीएम का खुद को अगले पीएम के तौर पर देखना स्वाभाविक है।
चर्चाएं चलने लगी थी कि योगी अक्सर यह जताते हैं कि बीजेपी में पीएम मोदी के बाद वह ही विकल्प हैं। जिसका सीधा सा मतलब यही है कि वह यूपी की गलियों से निकलकर सीधे प्रधानमंत्री पद की कुर्सी पर आसीन होने की लालसा कर बैठे थे। सीएम योगी को प्रधानमंत्री बनने की लालसा हो भी क्यों न, सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर भी हमेशा सीएम योगी और पीएम मोदी की तुलना दिखती है। जिसका मतलब है कि मोदी के बाद योगी। कई बार योगी को पीएम चेहरे की तरह पेश किया गया। अभियान चलाए गए जैसे, ‘पीएम कैसा हो, योगी जी जैसा हो।’
कयास लगाया जा रहा था कि कैबिनेट विस्तार की चर्चा के पीछे केंद्रीय हाई कमान की कोशिश योगी आदित्यनाथ के प्रभाव को कम करने और उनकी कथित मनमानीपूर्ण कार्यशैली को रोकने की है। आपको बता दें कि सीएम योगी की इस कथित मनमानी कार्यप्रणाली के पीछे वजह उन्हें आरएसएस का समर्थन होना भी मानी गई थी। लेकिन सीएम योगी ने राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा की बात को खारिज करके एक तरह से केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई को लेकर अटकलों पर पूर्णविराम लगाने की कोशिश की है।