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मंदिर नहीं खोलने पर चौतरफा घिरे सीएम उद्धव ठाकरे ! क्या निर्णय बदलेंगे उद्धव ?

By: RNI Hindi Desk 
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मंदिर नहीं खोलने पर चौतरफा घिरे सीएम उद्धव ठाकरे ! क्या निर्णय बदलेंगे उद्धव ?

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का कहर सबसे अधिक देखा गया है। आपको बता दे की कोरोना वायरस के चलते लगाए गए प्रतिबंधों में फिलहाल मंदिरों के कपाट बंद रखे गए हैं और अब राज्य में इस बात पर राजनीति शुरू हो गई है।

इस बाबत राज्य की गठबंधन वाली शिवसेना वाली सरकार का विरोध जारी है। आपको बता दे की मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य स्थित सिद्धिविनायक मंदिर के सामने प्रदर्शन किया।

अब इसी मामले पर लोगों के रिएक्शन भी आना शुरु हो गए है। राज्यपाल के द्वारा लिखी गई चिट्ठी के बाद उद्धव ने जो बयान दिया है उसकी हर जगह आलोचना हो रही है। वही अब एक्ट्रेस कंगना भी इस विवाद में कूद गयी है।

https://twitter.com/KanganaTeam/status/1315950315972173825

उन्होंने कुछ देर पहले एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने सीएम उद्धव के रवैये की कड़ी आलोचना की है और उनके हिंदुत्व वाले बयान पर भी चुटकी ली है। उन्होंने लिखा की ये जानकर अच्छा लगा कि गुंडा सरकार से माननीय गवर्नर साहब सवाल पूछ रहे हैं।

गुंडों ने बार और रेस्टोरेंट्स को तो खोल कर रखा है लेकिन रणनीति के हिसाब से मंदिरों को बंद कर रखा है। सोनिया सेना तो बाबर की सेना से भी घटिया बर्ताव कर रही है। दरअसल इससे पहले राज्यपाल कोश्यारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।

अपनी चिट्ठी में राज्यपाल ने कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ सरकार ने बार और रेस्तरां खोल दिए हैं, लेकिन मंदिर नहीं खोले गया। ऐसा न करने के लिए आपको दैवीय आदेश मिला या अचानक से सेक्युलर हो गए।

राज्यपाल के इस पत्र पर उद्धव ने भी जवाब लिखकर दे दिया। उन्होंने लिखा- जैसे तुरंत लॉकडाउन लगाना ठीक नहीं था। वैसे ही तुरंत ही इसे हटाना ठीक नहीं है। और हां, मैं हिंदुत्व को मानता हूं। मुझे आपसे हिंदुत्व के लिए सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।

उद्धव ठाकरे ने लिखा है कि महाराष्ट्र में धार्मिक स्थल खोलने की चर्चा के साथ कोरोना के बढ़ते मामलों का भी ध्यान रखना चाहिए। मुझे अपना हिंदुत्व साबित करने के लिए आपसे सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।

आपको बताते चले, कंगना ने मुंबई की तुलना पीओके से की तो शिवसेना समेत कई लोगों ने उन्हें अपने निशाने पर ले लिया था लेकिन उसके बाद भी वो 9 सितम्बर को मुंबई गई थी। उसी दिन  बीएमसी ने उनके अवैध निर्माण वाले ऑफिस के हिस्से को गिरा दिया था और वो केस फिलहाल अदालत में चल रहा है।

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