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बिजली का नया टैरिफ जनता के साथ छलावाः नागरिक उपभोक्ता मंच, बढे हुए दाम वापस लेने की मांग

आयोग ने अपनी टैरिफ लिस्ट में यह भी जिक्र किया है कि बाहर दूसरे राज्यों को जो बिजली दी जाएगी, उसकी कीमत 3.81 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बेची जाएगी। आयोग के ही आदेश में प्रदेश की जनता के लिए 7.05 रुपए प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है।

By: Naredra 
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बिजली का नया टैरिफ जनता के साथ छलावाः नागरिक उपभोक्ता मंच, बढे हुए दाम वापस लेने की मांग

जबलपुरः मध्यप्रदेश के 1.90 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में अब जल्द ही असर देखनों को मिलेगा। मध्यप्रदेश नागरिक उपभोक्ता मंच ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार प्रदेश की जनता के साथ छलावा कर रही है। जो बिजली सामान्य उपभोक्ताओं को 7.05 रुपए दे रही है, वहीं बिजली प्रदेश के बाहर सिर्फ 3.81 रुपए में बेच रही है। मंच ने मुख्यमंत्री के नाम आज अपनी एक शिकायत देते हुए बिजली के बढ़े हुए दामों को वापस लेने की मांग की है।

26 मार्च को राज्य सरकार ने बिजली के नए बढ़े हुए दाम जारी कर दिए है। आयोग ने अपनी टैरिफ लिस्ट में यह भी जिक्र किया है कि बाहर दूसरे राज्यों को जो बिजली दी जाएगी, उसकी कीमत 3.81 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बेची जाएगी। आयोग के ही आदेश में प्रदेश की जनता के लिए 7.05 रुपए प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है।

255 पेज की टैरिफ आदेश के पेज नंबर 76 में जो तालिका दी गई है, उसमें साफ समझ में आ रहा कि राज्य सरकार सरप्लस बिजली सस्ती बेच रही है, जबकि आम जनता को यही बिजली डबल रेट में दी जा रही है। आयोग की रिपोर्ट में यह भी दिया गया है कि 10.198.02 मिलियन यूनिट बिजली सरप्लस है।

नागरिक उपभोक्ता मंच के सदस्य मनीष शर्मा का कहना है कि सरकार ने निजी कंपनियों के अलावा दूसरे राज्यों से भी एमयू बिजली के लिए साइन करती है। उन्होंने बताया कि पीक समय जो कि अधिकतर गर्मी में होता है, उस समय बिजली की मांग प्रदेश में बढ़ जाती है, जिसकी पूर्ति के लिए एमयू साइन किए जाते हैं। एक समय पर सरकार अगर उस बिजली को खर्च नहीं कर पाती है, तो भी एमयू के तहत उस बिजली के दाम सरकार को चुकाने ही होगें।

यही वजह है कि उस घाटे की पूर्ति के लिए दूसरे राज्यों को सरकार कम दाम में बिजली बेचती है और प्रदेश की जनता के लिए दाम बढ़ाकर अधिक रुपए वसूल करती है। नियामक आयोग से 10 प्रतिशत दाम बढ़ाने की मांग की गई थी, जिसे स्वीकार किया गया है।

मंच की ओर से बताया गया कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरलम में बिजली के रेट नहीं बढ़ाए गए है, बल्कि घटाए गए है। मांग की गई है कि राज्य सरकार ने इन राज्यों से अनुसरण क्यों नहीं किया, यह जांच का विषय है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस और ध्यान नहीं देती है, तो पूरे प्रदेश मे आंदोलन किया जाएगा।

जबलपुर से संवाददाता दिनेश चौधरी की रिपोर्ट

 

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