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कश्मीर के मसले में चीन को किया शामिल : अब फारूक अब्दुल्ला का जमकर हो रहा विरोध

By: RNI Hindi Desk 
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कश्मीर के मसले में चीन को किया शामिल : अब फारूक अब्दुल्ला का जमकर हो रहा विरोध

कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद भी ना जाने क्यों उस पर राजनीति की जा रही है ! दरअसल नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुला ने एक बार फिर जहरीला बयान दिया है जिससे की अब उन पर यह सवाल खड़े होने लगे की क्या वाकई में उन्हें कश्मीर के लोगों की चिंता है ?

दरअसल फारूक अब्दुल्ला ने कहा, कि वो जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 की बहाली के लिए कोशिश कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि चीन की मदद से जम्मू-कश्मीर में एकबार फिर आर्टिकल 370 की वापसी होगी।

फारूक अब्दुल्ला ने यह भी कहा था कि आर्टिकल 370 के हटने से ही चीन पूर्वी लद्दाख में हमलावर है। अब उनके इस बयान को समझे तो उनका यह कहना है की धारा 370 हटने के बाद चीन की मदद वो ले सकते है तो सबसे पहले तो धारा 370 हटना इस देश का आंतरिक मुद्दा है इसमें चीन का क्या काम ?

दूसरी और धारा 370 हटने के बाद जो कश्मीर के लोगों को उनका हक़ मिला है क्या वो उसके खिलाफ है ? समझ में नहीं आ रहा है की वो क्यों इस तरह चीन को बीच में ला रहे है।

वही इस देश की संसद भी कह चुकी है की पीओके सहित पूरा कश्मीर भारत का है तो क्या एक सांसद होने के नाते उनका बयान गैर जिम्मेदाराना नहीं है ? खैर, अब फारूक अपने ही दिया बयान में उलझते हुए नजर आ रहे है।

दरअसल आज खबरें आई है की दिल्ली में चीनी दूतावास के बाहर कुछ पोस्टर देखे गए हैं, जिसमें लिखा है कि चीन फारूक अब्दुल्ला को गोद ले ले और अपने देश ले जाए।

फारूक के इसी बयान पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि ये वहीं फारूक अब्दुल्ला हैं, जिन्होंने कहा था कि PoK क्या तुम्हारे बाप का है, जो तुम पीओके ले लोगे, क्या पाकिस्तान चूड़ियां पहन रखी हैं।

पात्रा ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि फारूक के बयान से कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने भी कहा था कि पीएम मोदी तो कायर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भी राहुल गांधी ने बयान देकर पाकिस्तान में खूब वाह-वाही लूटी थी।

संबित पात्रा ने कहा कि अगर फारूक अब्दुल्ला का ये मानना है कि चीन आर्टिकल 370 की वजह से पूर्वी लद्दाख में हमलावर है तो फारूक अब्दुल्ला कहीं ना कहीं चीन की विस्तारवादी मानसिकता को दर्शाते हैं।

आपको बता दे, पिछले साल धारा 370 हटने के बाद से ही घाटी ने राजनीतिक गतिविधि ठप है। फारूक और उनके बेटे उमर को लगभग एक साल की नजरबंदी के बाद सरकार ने रिहा किया था।

वही बात करे पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती की तो वो अभी भी नजरबंद है। देखा जाए तो वो अभी भी नजरबंद है और हाल ही में उनकी बेटी ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था।

अपनी याचिका में उनकी बेटी ने लिखा था की मेरी माँ को अब राजनीतिक गतिविधि शुरु करने की परमिशन मिले और उन्हें उनकी माँ से मिलने दिया जाए। दरअसल सरकार ने उन्हें इसलिए नजरबंद किया है ताकि उनकी सुरक्षा को कोई खतरा नहीं हो।

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