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अगर कैश का करते है लेन-देन तो इन बातों का रखे ध्यान, वरना घर पहुंच जाएंगे TAX अधिकारी…

By RNI Hindi Desk 
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नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों में खासकर कोरोना काल में डिजिटल ट्रांजैक्शन में काफी तेजी आई है। सरकार की तरफ से भी डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देने को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा कैश के इस्तेमाल को कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आपके लिए कैश संबंधी नियमों की जानकारी जरूरी है। अलग-अलग कामों के लिए एक लिमिट तक कैश का इस्तेमाल किया जा सकता है। उससे ज्यादा इस्तेमाल करने पर टैक्स विभाग के रडार पर आ सकते हैं।

खासकर फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन्स को ऐसे ट्रांजैक्शन की जानकारी शेयर करने को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। अगर एक वित्त वर्ष में एक बैंक के सिंगल या मल्टीपल अकाउंट में 10 लाख से ज्यादा कैश जमा किए जाते हैं (करेंट और टाइम डिपॉजिट को छोड़कर) तो बैंकों को इसकी जानकारी शेयर करनी होती है। अगर कोई क्रेडिट कार्ड बिल जमा करने के लिए एक लाख से ज्यादा कैश का इस्तेमाल करता है तो उसकी भी जानकारी बैंकों को शेयर करनी होगी। अगर किसी गुड्स या सर्विस के लिए 2 लाख से ज्यादा नकद लिया जाता है तो इसकी जानकारी भी शेयर करनी होगी। क्योंकि इन मामलों में टैक्स ऑडिट की जरूरत होगी। इस तरह के तमाम ट्रांजैक्शन सेक्शन 61A के तहत रिपोर्ट किए जाएंगे।

कैश की लिमिट

1) कैश में 2000 रुपये से ज्यादा का चंदा या दान नहीं दिया जा सकता है।

(2) 5000 रुपये से ज्यादा कैश में मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट नहीं है।

(3) 10 हजार रुपये से ऊपर बिजनेस के लिए कैश में खर्च करने पर रकम को आपके मुनाफे की रकम में जोड़ लिया जाएगा।

(4) 20 हजार रुपये से ऊपर कैश में लोन न तो लिया जा सकता है ना ही दिया जा सकता है। इस नियम को तोड़ने पर जुर्माना देना होगा।

(5) 50 हजार रुपये से ऊपर की रकम फॉरेन एक्सचेंज में जाकर नहीं ले सकते हैं।

(6) 2 लाख रुपये से ऊपर कैश में कोई खरीदारी नहीं की जा सकती है।

(7) बैंक से 2 करोड़ रुपये ज्यादा कैश निकालने पर टीडीएस लगेगा।

इंडिविजुअल के लिए रिटर्न फाइलिंग के समय कैश ट्रांजैक्शन को रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं होती है। अगर वह कोई बिजनेस चलाता है जिसमें ऑडिट की जरूरत होती है तब इसकी रिपोर्टिंग जरूरी है। बिजनेस पर्पस के लिए भी अलग-अलग कामों के लिए कैश की लिमिट तय की गई है। बिजनेस में रोजाना आधार पर 10 हजार कैश ट्रांजैक्शन किए जा सकते हैं। इसके अलावा बिजनेस पर्पस के लिए 20 हजार से ज्यादा लोन ना तो कैश में लिए जा सकते हैं और ना ही जमा किए जा सकते हैं। इसके अलावा इंडिविजुअल को एक वित्त वर्ष में सिंगल या मल्टीपल लोगों से 2 लाख से ज्यादा कैश रिसीव नहीं करना चाहिए।

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