नई दिल्ली: असम में भाजपा व एनडीए (NDA) विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद हिमंत बिस्व सरमा को मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है।जबकि असम के पूर्व मुख्यमंत्रीसर्बानंद सोनोवाल (SarbanandaSonowal) मुख्यमंत्री पद के दौड़ में पीछे रह गए।बीजेपी के विधायक दल की बैठक में हिमंत बिस्वा सरमा के नाम पर मुख्यमंत्री पद की अंतिम मुहर लगाई गई। सवाल ये है कि बीजेपी की लगातार दूसरी बार जीत के बाद भी सोनोवाल को सीएम पद का दावेदार क्यों नहीं समझा गया। इसका जवाब होगा कि सरमा का असम में पार्टी के लिए किया गया काम।
आपको बता दें कि सरमा राजनीतिक पारी में चार बार से विधायक रह चुके हैं, इसके अलावा वह वर्ष 2001 से ही असम सरकार के मंत्री भी रहें हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सरकार के हर मुश्किल दौर में बेहतरीन कार्य किया। मुश्किलों दौरों को समझने व उनसे निपटने की सूझबूझ के कारण उनको पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया व तरूण गोगोई ने उनको पुरस्कृत किया था। गोगोई के साथ उनके मतभेद होने के बाद सरमा वर्ष 2015 में कांग्रेस को छोड़कर बाजपा में शामिल हुए थे।
काम के दम पर मिली जिम्मेदारी
सरमा असम के लोगों की भावनाओं को समझते हैं। उन्हें ये मालूम है कि वहां के लोगों क्या चाहते हैं।उन्होंने कांग्रेस के दो मुख्यमंत्रियों के साथ कई वर्षों तक कार्य किया है।
हिमंत बिस्वा सरमा के कार्य
बीते दिनों असम में वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए सरमा ने कई बेहतर काम किया। आपको बता दें कि जीएसटी सबसे पहले असम में ही लागू किया गया था। इसके साथ ही सरमा ने अपने कार्यकाल में असम की लोकप्रिय योजना अरुनोदय को शुरू किया था। इस योजना में बेरोजगार महिलाओं को सालाना आठ हजार रूपये बतौर भत्ता दिया गया।