मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में विकास गतिविधियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए जवाबदेही तय करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के बीते दो वर्ष उपलब्धियों से परिपूर्ण रहे हैं और केंद्र सरकार ने भी प्रदेश की प्रगति को सराहा है। यह सफलता सभी विभागों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है, जिसे आगे और तेज गति देने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने ये विचार मंत्रालय में आयोजित वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में व्यक्त किए। बैठक वर्ष 2026 में शासन की योजनाओं, निर्माण परियोजनाओं और कार्यक्रमों के समयबद्ध क्रियान्वयन पर केंद्रित रही।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिए सभी विभागों को मिशन मोड में कार्य करना होगा, ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों तक सरलता से पहुंचे। इसके लिए प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत किया जाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 औद्योगिक विकास की दृष्टि से सफल रहा है, जबकि 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” का है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक-दो विभागों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 15 से अधिक विभागों की संयुक्त भागीदारी से संचालित होगा। इसमें कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, जल संसाधन, मत्स्य पालन, वन, एमएसएमई, औद्योगिक निवेश, मंडी बोर्ड, एमपी एग्रो, दुग्ध संघ, मार्कफेड और आजीविका मिशन जैसे विभाग शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोविड काल से प्रदेश में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी शासकीय कार्यालयों में प्रातः 10 बजे कार्य अनिवार्य रूप से प्रारंभ हो। उन्होंने निर्देश दिए कि इसके लिए बायोमेट्रिक और अन्य तकनीकी प्रणालियों का उपयोग किया जाए, जिससे अनुशासन और कार्य निष्पादन दोनों में सुधार हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विकास और जनकल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के निरंतर संपर्क में रहें और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं से समय रहते अवगत कराएं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के लिए आगामी 5 वर्षों की कार्ययोजना तथा 3 वर्षों के बजट अनुमान तैयार किए जा रहे हैं। सड़क, अस्पताल, सिंचाई परियोजनाओं और सार्वजनिक भवनों के निर्माण की समेकित योजनाएं बनाकर उनका दस्तावेजीकरण किया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 12 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक ‘संकल्प से समाधान अभियान-वन’ संचालित किया जाएगा। यह अभियान 106 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं पर केंद्रित होगा।
प्रथम चरण (12 जनवरी-15 फरवरी): घर-घर जाकर आवेदन
द्वितीय चरण (16 फरवरी-16 मार्च): क्लस्टर स्तर पर शिविर
तृतीय चरण (16-26 मार्च): ब्लॉक स्तर पर निराकरण
चतुर्थ चरण (26-31 मार्च): जिला स्तर पर शेष प्रकरणों का निराकरण
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 31 मार्च 2026 तक सभी आवेदनों का अनिवार्य निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “लाल सलाम को अंतिम सलाम” कहने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना की और वन विभाग की उपलब्धियों पर भी संतोष व्यक्त किया। उन्होंने सफल उद्यमियों, नवाचार करने वाले किसानों को उदाहरण बनाकर युवाओं को प्रेरित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मृत्यु भोज, विवाह समारोहों में अपव्यय रोकने जैसे सामाजिक सुधारों के लिए वातावरण बनाया जाए। साथ ही प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए गायत्री परिवार एवं अन्य सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन और पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने भी अपने विचार रखे। बैठक में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, पुलिस और भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।