रिपोर्ट: सत्यम दुबे
लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में जुटती जा रही हैं। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी हो या फिर मायावती की बहुजन समाज पार्टी सभी जातीय समींकरण साधने में जुट गईं हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी भी सूबे में जातीय समींकरण साधने में लग गई है।
आपको बता दें कि BJP ने पिछड़ों को एकजुट करने का निर्णय लिया है। भारतीय जनता पार्टी अब सितंबर और अक्टूबर में बड़े स्तर पर OBC सम्मेलन करने जा रही है। 2022 विधानसभा चुनाव में 350 सीटों से अधिक सीटों पर जीत और 50% से अधिक वोट बैंक अपने पक्ष में करने के हौसले के साथ भारतीय जनता पार्टी सितंबर व अक्टूबर के माह में ओबीसी सम्मेलन करने जा रही है।
बीजेपी इस सम्मेलन के साथ प्रदेश में पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियों को एकजुट करने का काम करेगी। OBC सम्मेलन की जिम्मेदारी सूबे के उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के कंधों पर रहेगी। इन्ही की अगुवाई में यह सम्मेलन कराया जाएगा। साल 2017 विधानसभा चुनाव के बाद 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भी भाजपा ने 2018 में करीब 1 से डेढ़ महीने तक पिछड़ी जनजाति, पिछड़ी जातियों के सम्मेलन किए थे।
जिनमें मौर्य, कुशवाहा ,कुर्मी ,यादव ,निषाद समेत कई पिछड़ी जातियों को शामिल कर यह सम्मेलन लगभग डेढ़ महीने तक लगातार कराए गए थे। जिसका परिणाम था कि 2019 में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई थी। इसी फॉर्मूले को बीजेपी एक बार फिर 2022 विधानसभा चुनाव में प्रयोग करने के मूड में हैं।
उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने बातचीत में बताया कि बीजेपी संगठन के माध्यम से भी जो संरचना है, उसमें भी पिछला वर्ग मोर्चा बना हुआ है। उसमें भी और संवैधानिक व्यवस्था है, उसके अनुसार भी दो बार निर्धारण किया गया है सामान्य वर्ग, अनुसूचित जनजाति वर्ग और पिछड़ा वर्ग एक व्यवस्था के अंतर्गत बड़ी संख्या में पिछड़ा वर्ग और वह भारतीय जनता पार्टी से दिल से जुड़ा हुआ है। हर मोर्चे के सम्मेलन इसी प्रकार से किए जाएंगे।