Home उत्तर प्रदेश बावनखेड़ी कांड: शबनम से भी ज्यादा खुंखार हैं ये तीन महिलाएं…इनकी भी तय है फांसी

बावनखेड़ी कांड: शबनम से भी ज्यादा खुंखार हैं ये तीन महिलाएं…इनकी भी तय है फांसी

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रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: बावनखेड़ी कांड का नाम आपने तो सुना ही होगा, इन दिनों ये कांड काफी चर्चा में है, फिर भी अगर आप इस कांड को नहीं जानते हैं, तो हम आपको बताते हैं, कि क्या है बावनखेड़ी कांड, दरअसल बावनखेड़ी अमरोहा जिले का एक गांव है। बावनखेड़ी गांव में 14/15 अप्रैल साल 2008 की रात सात लोगो की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई। जिससे उत्तर प्रदेश समेत देश हिल गया था। इस परिवार का सिर्फ एक सदस्य जिंदा बचा था, और उसका नाम है शबनम। एक ही परिवार के सात लोगो की हत्या से सहमी प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 5 लाख रुपये की आर्थिक मदत की घोषणा कर दी।
इधर शबनम परिवार के सात लोगो की हत्या हो जाने से रोत-रोते बेहोश हो जाती तो कभी उसी अस्पताल में भर्ती कराया जाता। लेकिन दूसरी ओर इस हत्याकांड से पुलिस भी सहम गई थी। लगातार मामले का खुलासा करने के लिए छानबीन करने लगी। हत्याकांड के तीसरे दिन पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली पुलिस ने मामले का खुलासा कर दिया। मामले का खुलासा होते ही एक बार फिर सबको बड़ा झटका लगा। इस हत्या कांड की मुख्य आरोपी कोई और नहीं बल्की परिवार की बची इकलौती सदस्य शबनम निकली।

जिसके बाद मामला कोर्ट में गय़ा और सारे आरोप शबनम के सिद्ध हो गये। जिला अदालत ने 15 जुलाई 2010 को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए शबनम को फांसी की सजा सुना दी। जिला अदालत के फैसले के खिलाफ शबनम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की जहां तीन साल तक मामला चला और हाईकोर्ट ने 4 मई 2013 को शबनम की अपील निरस्त कर दी। हाईकोर्ट से भी मायूसी मिलने के बाद शबनम सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सर्वोच्च न्यायालय में दो साल तक सुनवाई चली। सुप्रीम कोर्ट ने भी शबनम की सजा 15 मार्च 2015 को बरकरार रखने का फैसला सुना दिया।
अदालतो से मायूसी मिलने के बाद शबनम ने राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाया जिसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शबनम की रिव्यू पिटीशन को 23 जनवरी 2020 को खारिज कर दी। अब केवल शबनम की डेश वारंट जारी होनी है। जिसके बाद उसे फांसी दे दी जायेगी।
आपको बता दें कि आजाद हिंदूस्तान शबनम पहली महिला होगी जिसको फांसी दी जायेगी। इस समय लगभग देश में 35 दोषियों की फांसी पेंडिंग है। जिसमें शबनम के साथ तीन और महिलाएं शामिल हैं। जिनके फांसी होना बाकी है। आइये आपको उन तीनो महिलाओं के बारे में बताते हैं।
इन महिलाओं में हरियाणा की सोनिया, महाराष्ट्र की रेणुका और सीमा हैं, जिनकी दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज की चुकी है।
इन तीनों महिलाओं की अपराध के बारे में बात करें तो सबसे पहले हरियाणा की सोनियां के बारे में बताते हैं। सोनिया ने अपने पिता की प्रॉपर्टी के लालच में 23 अगस्त 2001 को अपने पति संजीव के साथ मिलकर परिवार के आठ लोगो की हत्या कर दी थी। जिसके बाद साल 2004 को सेशन कोर्ट ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई। सेशन कोर्ट के फैसले को साल0 2005 में हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था। लेकिन साल 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने वापस से सेशन कोर्ट की सजा को बरकरार रखने का फैसला दिया।

आपको बता दें कि समीक्षा याचिका खारिज होने के बाद सोनिया व संजीव ने राष्ट्रपति से दया याचिका लगाकर गुहार की। जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया है। अब इन दोनो के कोर्ट से डेथ वारंट जारी होना बाकी है।
वहीं आजाद भारत में शबनम, सोनिया के बाद मुंबई की रेणुका और सीमा है, जिन्हे फांसी होनी है। आपको इनके अपराध के बारे में बताते हैं, जिसे जानकर आपकी रुह कांप जायेगी। रेणुका और सीमा दोने सगी बहनें हैं। दोनो बहने अपनी फांसी का इंतजार कर रही हैं। आपको बता दें कि इन दोने महिलाओं पर 42 बच्चों के हत्या का दोष है। इन हत्याओं में इन दोनो की मां भी शामिल थी। लेकिन बहुत पहले उसकी एक बिमारी के कारण मौत हो गई थी।
इन दोनों कै‍दियों की मां अंजना गावित नाशिक की रहने वाली थी। जहां एक ट्रक ड्राइवर से प्‍यार में आकर उसी के साथ भागकर पुणे आ गई। कुछ दिन साथ में रहने के बाद, उसको बेटी पैदा हुई जिसका नाम रेणुका है। कुछ दिन बाद प्रेमी ट्रक ड्राइवर पति ने अंजना को छोड़ दिया। अंजना सड़क पर आ गई। एक साल बाद वो एक रिटायर्ड सैनिक मोहन गावित से शादी कर ली। जिससे उसकी दूसरी बेटी सीमा पैदा हुई कुछ दिन बाद मोहन ने अंजना को छोड़ दिया। इसे बच्चियों के साथ सड़क पर आने के बाद वह चोरियां कर पेट पालने लगी।
आपको बता दें कि दोनों बेटियां जब बड़ी हुईं तो मां के साथ चोरी करने में उसकी मदद करने लगीं। धीरे-धीरे इनका हौंसला बढ़ा जिसके बाद ये बच्चे भी चोरी करने लगी। ये तीनों बच्‍चे चुराकर उनसे चोरी करने लगी। इनको लगता था कि अगर चोरी करते कहीं पकड़े गये तो बच्चो को आगे कर देंगी जिसके बाद लोग बच्चो को देखकर छोड़ देंगे। इसके बाद इन मां-बेटियों का बच्चे चुराने का सिलसिला शुरू हुआ। और ये तब तक जारी रहा जब तक इस गिरोह का पर्दाफाश नहीं हुआ। तीनों यही करती थीं। बच्चा उठातीं और फिर चोरी करने निकल पड़तीं।
जब ये तीनों कहीं पकड़ी जातीं तो बच्चे को जमीन पर पटक देतीं ताकि लोगों का ध्यान चोरी से भटक जाए। बाद में बच्चा काम का नहीं रहता तो भी उसे मार देतीं। ज्यादातर को पटक-पटक मार देतीं । इस तरह तीनों ने 1990 से लेकर 1996 के बीच यानी छह साल में 42 बच्चों की हत्या कर दी।
इनको 13 किडनैपिंग और 6 हत्याओं के मामलों में शामिल पाया गया। जिसके बाद साल 2001 में एक सेशन कोर्ट ने दोनों बहनों को मौत की सजा सुनाई। हाईकोर्ट में इस केस की अपील में साल 2004 को हाईकोर्ट ने भी ‘मौत की सजा’ को बरकरार रखा। मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि ऐसी औरतों के लिए ‘मौत की सजा’ से कम कुछ भी नहीं है। साल 2014 में राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इनकी क्षमा याचना को खारिज कर दिया। जिसके बाद इनकी फांसी होना तय हो गया।
आपको बता दें कि इन चारों महिलाओं में जिसको पहले फांसी पर लटकाया जायेगा। वो आजाद हिंदूस्तान की पहली महिला होगी, जो फांसी के फंदे पर लटकेगी।

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