बांदा: कोरोना वायरस की वजह से इतिहास में ये पहला मौका था कि ईद की सुबह ईदगाह सूनी रही। साल में सिर्फ एक बार पढ़ी जाने वाली खास नमाज घर के कमरों में अदा हुई। ईदगाह से शुरू होकर घरों की ड्योढ़ी तक पूरे दिन चलने वाला गले मिलन भी दूर से ही मुबारकबाद के लेनदेन में सिमट गया।
वतादें कि, सोमवार को ईद मनाई गई। जानलेवा महामारी कोरोना के मंडराते खतरे के बीच लागू हुए लॉकडाउन का पूरे रमजान माह सभी ने खुशी-खुशी पालन किया। मस्जिदों में सामूहिक नमाजें नहीं हुईं।
सुबह से ही लोगों ने घर के किसी कमरे, बरामदे या आंगन में ईद की नमाज का इंतजाम शुरू कर दिया। पूरे परिवार के पुरुषों ने एक साथ नमाज अदा की। साथ ही, मोबाइल से व्हाट्सएप और मैसेज के जरिये मुबारकबाद देने की होड़ रही।