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काशी हिंदू विश्वविद्यालय बना देश का पहला हिंदी में इंजीनियरिंग कराने वाला संस्थान, इस सत्र से हिंदी में कर सकेंगे B.tech

IIT बीएचयू अभी बीटेक में पहले साल के छात्रों के लिए यह सुविधा देने जा रही है। इस तरह की सुविधा देने वाला IIT बीएचयू देश का पहला संस्थान है। यह फैसला आईआईटी बीएचयू के निदेशक और राजभाषा समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन ने बुधवार को आयोजित हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम में लिया।

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

वाराणसी: बीटेक की पढ़ाई करने की किसी ने सोची है, लेकिन उसको अंग्रेजी नहीं आ रही है, तो अब उसको परेशान होने की जरुरत नहीं है। अब आप बिना अंग्रेजी के भी बीटेक कर सकते हैं। चौकिए मत, अब आप हिंदी भाषा में भी बीटेक की पढ़ाई कर सकेंगे। IIT बीएचयू इस सत्र से हिंदी भाषा में बीटेक की पढ़ाई करायेगा।

आपको बता दें कि IIT बीएचयू अभी बीटेक में पहले साल के छात्रों के लिए यह सुविधा देने जा रही है। इस तरह की सुविधा देने वाला IIT बीएचयू देश का पहला संस्थान है। यह फैसला आईआईटी बीएचयू के निदेशक और राजभाषा समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन ने बुधवार को आयोजित हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम में लिया।

 बीएचयू के ऐनी बेसेंट व्याख्यान कक्ष संकुल में हिंदी पखवाड़ा का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया है। 1 से 15 सितंबर तक आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कई निर्णय लिए जाएंगे। इस दौरान प्रोफेसर जैन ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा को बनाया गया है। इसके लिए हम हिंदी माध्यम से प्रथम वर्ष की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।

इसके साथ ही उन्होने कहा कि स्टार्टअप को बढ़ावा देने के कार्य में हिंदी काफी सहयोग करेगी। अभी हिंदी पर आधारित सिलेबस भी तैयार किया जा रहा है। उन्होने आगे बताया कि इसमें अंग्रेजी के उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा, जो कि आम बोलचाल में हैं।

पिछले साल ही शिक्षा मंत्रालय की ओर से IIT में भी हिंदी माध्यम से बीटेक की पढ़ाई करने पर विचार किया गया था। मंत्रालय ने IIT बीएचयू से तैयारी शुरू करने की बात कही थी। कोरोना महामारी के कारण इस योजना पर ब्रेक लग गया था। बुधवार को निदेशक प्रोफेसर जैन ने इस पर सहमति दे दी है। जल्द ही नए कोर्स करिकुलम में भी B.tech in Hindi जोड़कर जारी किया जाएगा।

आपको बता दें कि प्रोफेसर जैन ने विभागीय और एकेडमिक कार्य को हिंदी में ही करने की सलाह दी। वहीं संस्थान की राजभाषा क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष आचार्य अनिल कुमार त्रिपाठी, हिंदी भाषा में कार्यालय के कार्यों को करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। रजिस्ट्रार राजन श्रीवास्तव ने वर्ष 2020-21 में संस्थान में हिंदी में किए गए कार्यों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हम लगातार मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।

 

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