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किसान भाई केले को बचाये पनामा विल्ट रोग से और बढ़ाये अपना मुनाफा

By: RNI Hindi Desk 
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किसान भाई केले को बचाये पनामा विल्ट रोग से और बढ़ाये अपना मुनाफा

इस देश में केला अपने स्वाद, पौष्टिकता, और डाइजेस्टिव गुणों के कारण काफी पसंद किया जाता है। लेकिन विश्व के प्राचीनतम फलों में शुमार केला, आज एक बेहद संक्रामक रोग से संकट में है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में पनामा विल्ट रोग बाहर से आया है।

1960 में इस बीमारी ने मध्य और दक्षिण अमेरिका में लगभग सभी केले की फ़सल को नष्ट कर दिया था। भारत में पिछले कुछ वर्षों से केला- किसान को तबाह कर रहा पनामा विल्ट नाम का ये रोग, अब एक बार फिर तेजी से फैल रहा है, बगीचे में लगे पेड़ एक-एक कर इसका शिकार हो रहे हैं।

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बाग के बाग इस बीमारी की चपेट में आकर साफ़ हो रहे हैं। किसान त्राहिमाम कर रहा है। उसके सामने देखते ही देखते बड़ी पूंजी औऱ मेहनत से लगाए गए बाग़ दम तोड़ रहे हैं। उन्हें इसका कोई हल नज़र नहीं आ रहा लेकिन आज हम आपको बताने वाले है कि कैसे आप इस रोग से अपने केले का बचाव कर सकते है !

क्या है पनामा विल्ट रोग –

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किसान आम बोलचाल की भाषा में केले की पीलीया बीमारी भी कहते हैं। ये मिट्टीजनित रोग फ्यूजेरियम नामक फंगस से फैलता है, जो 30-40 साल तक मिट्टी में जीवित रह सकते हैं।

मिट्टी से होता हुआ विल्ट रोग का फंगस जब केले के पौधे को चपेट में लेता है, तो उसके जाइलम को जाम कर देता है यानी मिट्टी से केले के पौधे में पानी और पोषण पहुंचाने वाला सिस्टम चॉक कर देता है,जिससे पौधा पीला पड़ने लगता है पहले पत्तियों पर प्रभाव पड़ता है।

इसके बाद फिर तनों के साइड में भूरे-काले रंग के धब्बे पड़ जाते हैं,फिर जड़ अपनी गोलाई में परत-दर-परत प्रभावित हो जाता है, और इस तरह पूरा पौधा अंत में सूखकर गिर जाता है।

पनामा विल्ट रोग से कैसे बचे ?

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विल्ट इतना संक्रामक और ख़तरनाक रोग है कि एक बार सामने आने के बाद इस पर कंट्रोल मुश्किल हो जाता है। इसलिए सावधानी बरत कर इससे बचाव करना ही बेहतर है।

इसके लिए एक पौधे के उपयोग में आई खुरपी, कुदाल,हंसिया या दंराती धोकर ही दूसरे पौधे के लिए इस्तेमाल करें। केले के बाग में फ्लड इरीगेशन ना करें,…बल्कि ड्रिप से सिंचाई करें,..क्योंकि इस रोग का फंगस पानी से भी फैलता है। इसके अलावा दवाओं का इस्तेमाल करें।

एक किलो ट्राइकोडर्मा को 25 किलो वर्मी कंपोस्ट में मिलाकर 7 से 10 दिन तक इस मिश्रण को छायादार जगह पर रखें। इससे पूरा मिश्रण 26 किलो ट्राइकोडर्मा में बदल जाएगा। इसे खेतों में इस्तेमाल करें। इसके अलावा कार्बेंडाजिम का स्प्रे हर महीने ज़रूरी है।

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