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आगरा में दिखा युवाओं का पर्यावरण के लिए प्रेम, लगाए खूब पेड़…

पेड़-पौधे, नदियां, जंगल, जमीन, पहाड़ आदि जीवन के लिए बहुत ही जरूरी हैं। प्रकृति से हम कितना कुछ लेते हैं, लेकिन बदले में हम क्या देते हैं? प्रदूषण। कई बड़े शहरों में आज पॉल्युशन लेवल इस कदर बढ़ गया है कि सांस लेना भी दूभर हो गया है। इसलिए, हम सबको इस बाद पर ध्यान देना होगा कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं, गंदगी और प्रदूषण न फैलने दें। ऐसे छोटे-छोटे प्रयासों से हम प्रकृति के लिए काफी कुछ कर सकते हैं। क्योंकि अगर प्रकृति संरक्षित है तो मानवीय जीवन सुरक्षित है।

By: RNI Hindi Desk 
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आगरा में दिखा युवाओं का पर्यावरण के लिए प्रेम, लगाए खूब पेड़…

आगरा: पेड़-पौधे, नदियां, जंगल, जमीन, पहाड़ आदि जीवन के लिए बहुत ही जरूरी हैं। प्रकृति से हम कितना कुछ लेते हैं, लेकिन बदले में हम क्या देते हैं? प्रदूषण। कई बड़े शहरों में आज पॉल्युशन लेवल इस कदर बढ़ गया है कि सांस लेना भी दूभर हो गया है। इसलिए, हम सबको इस बाद पर ध्यान देना होगा कि ज्यादा से ज्यादा  पेड़ लगाएं, गंदगी और प्रदूषण न फैलने दें। ऐसे छोटे-छोटे प्रयासों से हम प्रकृति के लिए काफी कुछ कर सकते हैं। क्योंकि अगर प्रकृति संरक्षित है तो मानवीय जीवन सुरक्षित है।

इसी को ध्यान में रखते हुए आगरा के युवा भी इस अभियान में हिस्सा ले रहे है। अब युवा पीढ़ी भी पर्यावरण और प्रकृति के प्रति संवेदनशील हो रही है, इसी क्रम में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में सेन्ट पॉल्स स्कूल के बारहवीं के छात्र आयुष भारद्वाज ने रोटरी क्लब ऑफ आगरा के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया। साथ ही प्रत्येक बृक्ष की सुरक्षा और रखरखाव का संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटरी क्लब अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने करते हुए कहा कि बृक्ष लगाने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं। इस अवसर पर डॉ आलोक मित्तल,प्रदीप मित्तल ,प्रवीण अग्रवाल, विनोद गुप्ता,संगीता अग्रवाल, मनोज कुमार उपस्थित रहे।

आपको बता दें कि आयुष भारद्वाज अक्सर ऐसे अच्छें कामों के लिए खबरों की सुर्खियों में बने रहते है। इस वृक्षारोपण के बारे में बात करते हुए आयुष का कहना है कि अगर हमें वातावरण को साफ रखना है तो हमें ज्यादा ज्यादा से पेड़ लगाना होगा।

5 जून को मनाया जाता है पर्यावरण दिवस

दुनियाभर में 5 जून के दिन हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन कई कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को पर्यावरण और प्रदूषण से हो रहे नुकसान के प्रति जागरुक किया जाता है। प्रदूषण का बढ़ता स्तर पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसके कारण कई जीव-जन्तू विलुप्त हो रहे हैं। वहीं इंसान कई प्रकार की गंभीर बिमारियों का शिकार भी हो रहे हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ की और से की गई थी। पर्यावरण दिवस की शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी। इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जिसमें भारत की ओर से तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था।

इस सम्मेलन के दौरान ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की भी नींव पड़ी थी। जिसके चलते हर साल विश्व पर्यावरण दिवस आयोजन का संकल्प लिया गया। जिससे लोगों को हर साल पर्यावरण में हो रहे बदलाव से अवगत कराया जा सके और पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने के लिए लोगों को समय-समय पर जागरुक किया जा सके।

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