रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: किसान आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया है। आंदोलन को लीड कर रहे राकेश टिकैत को विपक्षीय पार्टियों ने खुलकर अपना समर्थन देना शुरु कर दिया है। इस बीच शुक्रवार को अन्ना हजारे ने भी फैसला किया था कि वह भी सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठेगें। लेकिन बाद में उन्होन अनशन पर बैठने से मना कर दिया।
आपको बता दें कि उन्होने कहा कि जहां तक किसानों की बात है, मैं यह मुद्दा तीन साल से उठा रहा हूं। मैनें यही कहा कि किसान आत्महत्या क्यों कर रहा है। किसान आत्महत्या ना करें। उन्होने स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट सरकार लागू करे। स्वामी नाथन आयोग के मुताबिक किसान के लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत बढ़ाकर देना। इस पर अन्ना हजारे ने कहा कि स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट सरकार ने मान ली है। सरकार लगात मूल्य से 50 प्रतिशत बढ़ाकर देने पर राजी हो गई है। ऐसा मुझे पत्र मिला है। जिसके बाद मैने अपने अनशन को स्थगित कर दिया है।
अन्ना हजारे ने कहा कि जिन पंद्रह मुद्दो पर बात करनी थी। सरकार ने उसको मान लिया है। जिसके बाद मैने फैंसला किया है कि अब मैं अपना अनशन स्थगित कर रहा हूं।
आपको बता दें कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को दिन में अन्ना हजारे से भेंट की। चौधरी ने कहा कि हजारे की तरफ से मनोनीत कुछ सदस्यों के साथ एक उच्चस्तरीय समिति उनकी मांगों पर विचार करेगी और 6 महीने में रिपोर्ट सौंपेगी इसलिए फिलहाल वे अनशन करने का फैसला टाल दें जिसे अन्ना हजारे ने मान लिया। अन्ना हजारे अब मोदी सरकार के समर्थन में आ गये हैं।