1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. पोस्टमॉर्टम रूम में अचनाक जिंदा हो गयी लाश, डॉक्टर की हालत हो गयी खराब…

पोस्टमॉर्टम रूम में अचनाक जिंदा हो गयी लाश, डॉक्टर की हालत हो गयी खराब…

By: RNI Hindi Desk 
Updated:
पोस्टमॉर्टम रूम में अचनाक जिंदा हो गयी लाश, डॉक्टर की हालत हो गयी खराब…

रिपोर्ट- माया सिंह

महालिंगपुर: अगर  हम कहें कि लाश में जान आ सकती है तो शायद आप विश्वास नहीं करेंगे । लेकिन ऐसी ही एक आश्चर्यजनक घटना  उत्तरी कर्नाटक के एक सरकारी अस्पताल से सामने आई है । हॉस्पिटल में डॉक्टर्स भी दंग रह गए जब पोस्टमार्टम के दौरान स्ट्रेचर पर पड़ी ‘लाश’ में जान आ गई।  सोचिए अगर किसी  ब्रेन डेड शख्स को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाया जाए और उसकी बॉडी में हरकत होने लगे तो क्या होगा लेकिन ये बात सच है । आइए जानते है कि घटना के पीछे पूरा मामला क्या है।

कर्नाटक के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एक 27 साल के शख्स को डॉक्टर्स ने ब्रेन डेड डिक्लेअर कर दिया । उसके बाद पोस्टमॉर्टम के लिए उसे अटॉप्सी सेंटर ले जाया गया । पोस्टमॉर्टम शुरू होने से ठीक पहले ब्रेन डेड युवक के हाथों के रोंगटे खड़े हो गए , हल्का मूवमेंट भी हुआ , जिसे देख मौजूद डॉक्टर चौक गए ।

दरअसल , कर्नाटक के महालिंगपुर में 27 वर्षीय शंकर गोंबी 27 फरवरी को एक हादसे के शिकार हो गए । जिसके बाद एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उन्हें एडमिट किया गया । जहां दो दिन बाद डॉक्टर ने शंकर गोंबी को ब्रेन डेड घोषित कर दिया । अस्पताल प्रबंधन ने शंकर के परिवार से कहा कि  बॉडी ले जाए और सरकारी अस्पताल में पोस्टमॉर्टम कराएं । वहीं दूसरी ओर शंकर के परिजन और रिश्तेदार उसके अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गये थे ।

हेल्थ ऑफिसर के अनुसार जब शख्स की अटॉप्सी की जा रही थी तो उसके रोंगटे खड़े हो गए। इतना ही नहीं बाद में डॉक्टरों ने ध्यान दिया कि उसके हाथों में भी हरकत हो रही है। बता दें कि इस प्रतिक्रिया के बाद शख्स को तुरंत दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया गया ।

जानकारी के लिए बता दें कि अगर किसी इंसान को ब्रेन डेड (brain dead) घोषित कर दिया जाए तो इसका मतलब उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है और वो लगभग डेड है । ऐसी स्थिति में शरीर के अंदर सिर्फ ब्रेन काम नहीं करता है लेकिन बाकी के अंग जैसे हार्ट, लीवर, किडनी काम करते रहते हैं । जबकि मरीज का सांस लेना, शारीरिक गतिविधि करना और प्रतिक्रिया देना बंद हो जाता है ।

सरकारी अस्पताल के डॉ. एएस गालगली ने बताया कि मैंने अपने 18 साल के करियर में 400 से ज्यादा पोस्टमॉर्टम किए हैं, लेकिन इस तरह का केस पहली बार देखा है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...