कोरोना संक्रमण से इस वक्त पूरी दुनिया लड़ रही है। हर दिन इस संक्रमण से हजारों लोगों की जान जा रही है। इस बीमारी में कोई अपनों के साथ भी नहीं रह पा रहा है। इस जंग को बीमार खुद ही लड़ रहा है। ऐसे में कोरोना वॉरियर्स इन मरीजों की सेवा कर रहे हैं और मरीजों को ठीक भी कर रहे हैं।
कोरोना संक्रमण के इस दौर में कोरोना वॉरियर्स पिछले 7 महीने से अपनी जान जोखिम में डाल कर दूसरे लोगों की मदद कर रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं, जो अपने घर परिवार से दूर रहकर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। लेकिन बदकिस्मती से अगर किसी मरीज की जान चली जाती है तो उसका अंतिम संस्कार करने वाले भी वॉरियर से कम नहीं हैं।
ऐसी ही एक शख्सियत थे, दिल्ली के सीलमपुर इलाके में रहने वाले आरिफ खान। एम्बुलेंस ड्राइवर आरिफ खान कोरोना से होने वाली मौत के बाद उनका मरीजों का अंतिम संस्कार करते थे। ये अब तक 200 से ज्यादा मरीजों का दाह संस्कार कर चुके थे, लेकिन उनकी मौत खुद कोरोना से हो गई है।
कोरोना मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और मरीजों की मौत होने पर शव की सेवा करने वाले आरिफ खान की खुद कोरोना संक्रमण से ग्रसित हो गए। शनिवार को दिल्ली के हिंदूराव अस्पताल में उनकी मौत हो गई। उनका इलाज हिंदूराव अस्पताल में चल रहा था।
आरिफ के निधन पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा “कोविड महामारी के विरुद्ध अभियान के समर्पित योद्धा दिल्ली के श्री आरिफ खान की मृत्यु के समाचार से दुखी हूं। महामारी के दिनों में अपनी एम्बुलेंस से आपने मृतकों की सम्मानपूर्वक अंत्येष्टि में सहायता की। ऐसे समर्पित नागरिक की मृत्यु समाज के लिए क्षति है।”

बताया जाता है कि आरिफ खान पिछले 25 साल से शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ जुड़े थे। वह फ्री में एम्बुलेंस की सेवा मुहैया कराने का काम करते थे। यह सेवा दल दिल्ली – एनसीआर में फ्री आपातकालीन सेवाएं देता है।
जब किसी कोरोना मरीज की मौत हो जाती थी, और उसके परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं होते थे, तो आरिफ खान पैसे देकर भी उनकी मदद करते थे। 21 मार्च से आरिफ खान कोरोना के मरीजों को उनके घर से अस्पताल और आइसोलेशन सेंटर तक ले जाने का काम कर रहे थे।
बताया जाता है कि आरिफ की तबीयत 3 अक्टूबर को खराब हुई थी। तब भी वह कोरोना संक्रमित को लेकर अस्पताल जा रहे थे। आरिफ ने तबीयत बिगड़ने पर कोरोना टेस्ट कराया।
जिसके बॉस उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। परिजनों के मुताबिक जिस दिन उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, उसी दिन उनका निधन हो गया। वे परिवार में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे।