रिपोर्ट: सत्यम दुबे
पटना: कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है। कोरोना के हाहाकार के बीच ब्लैक फंगस भी देश में तेजी के साथ फैल रहा है। राजस्थान सरकार ने इस बिमारी को भी महामारी घोषित कर दिया है। ब्लैक फंगस से निजात मिला भी नहीं था कि बिहार की राजधानी पटना में व्हाइट फंगस के 4 मामले मिले हैं।
कहा जा रहा है कि व्हाइट फंगस, ब्लैक फंगस से भी ज्यादा घातक है। यह फेफड़ों के संक्रमण का मुख्य कारण है। इसके साथ ही, यह फंगस इंसान के त्वचा, नाखून, मुंह के अंदरूनी हिस्से, आमाशय, आंत, किडनी, गुप्तांग और दिमाग पर भी बेहद बुरा असर डालता है।
आपको बता दें कि पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉ. एसएन सिंह ने इस नई बिमारी की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इन चारों मरीजों में कोरोना जैसे लक्षण थे। इन मरीजों कोरोना के तीनों टेस्ट रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और आरटी-पीसीआर किए गए, लेकिन तीनों ही रिपोर्ट निगेटिव आईं। वहीं, कोरोना संबंधी दवाओं का भी उन पर कोई असर नहीं हो रहा था। ऐसे में वृहद जांच की गई, जिसमें व्हाइट फंगस होने की जानकारी मिली। डॉ. सिंह ने बताया कि एंटी फंगल दवाएं देने के बाद मरीज ठीक हो गए।
इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल है, जब मरीज का सीटी स्कैन किया जाता है तो फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण कोरोना जैसे ही नजर आते हैं। ऐसे में अंतर करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीजों का रैपिड एंटीजन और आरटी-पीसीआर टेस्ट निगेटिव आता है। डॉक्टर ने बताया कि अगर सीटी स्कैन में कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे हैं बलगम का कल्चर कराने से व्हाइट फंगस की पहचान की जा सकती है।
व्हाइट फंगस की चपेट में वे कोरोना मरीज आ रहे हैं, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। ऐसे में व्हाइट फंगस उनके फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है। डॉक्टरों की मानें तो, व्हाइट फंगस होने की वजह भी प्रतिरोधक क्षमता की कमी है। इसके अलावा डायबिटीज, एंटीबायोटिक का सेवन या काफी समय तक स्टेरॉयड लेने से यह फंगस मरीजों को अपनी चपेट में ले रहा है।
वहीं कैंसर के मरीजों को भी इस फंगस से सावधान रहने की जरूरत है। इसके अलावा नवजात में यह बीमारी डायपर कैंडिडोसिस के रूप में होती है, जिसमें क्रीम कलर के सफेद धब्बे दिखते हैं। छोटे बच्चों में यह ओरल थ्रस्ट करता है। महिलाओं में यह ल्यूकोरिया का मुख्य कारण है।
डॉक्टरों ने इसके बचाव के लिए बताया कि व्हाइट फंगस से बेहद आसानी से बचा जा सकता है। ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों के उपकरण विशेषकर ट्यूब आदि जीवाणु मुक्त होने चाहिए। ऑक्सीजन सिलेंडर ह्यूमिडिफायर के लिए स्ट्रेलाइज वॉटर का इस्तेमाल करना चाहिए। इस फंगस से मरीजों को बचाने के लिए सुनिश्चित करना होगा कि बीमार व्यक्ति जो ऑक्सीजन ले रहा है, वह विषाणुमुक्त हो।