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जयंती विशेष: सवालाख से एक लड़ाऊं चिड़ियों सौं मैं बाज लड़ाऊं तबे गोबिंद सिंह नाम कहाऊं

By: RNI Hindi Desk 
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जयंती विशेष: सवालाख से एक लड़ाऊं चिड़ियों सौं मैं बाज लड़ाऊं तबे गोबिंद सिंह नाम कहाऊं

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: सवालाख से एक लड़ाऊं चिड़ियों सौं मैं बाज लड़ाऊं तबे गोबिंद सिंह नाम कहाऊं। इस पंक्ति के जनक गुरु गोविंद सिंह सिख समुदाय के दसवें गुरु, जिन्हे महान स्वतंत्रता सेनानी के रुप में भी जाना जाता है। बुधवार को 20 जनवरी को इनकी जयंती के रुप में मनाया जाता है। गुरु गोविंद सिंह की वीरता और त्याग की मिशाल आज के युवा पीढ़ी को भी दी जाती है। हिंदी कैलेंडर से पौष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गोबिंद सिंह जी का जन्म पटना साहिब में हुआ था। गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार का बलिदान कर दिया था। उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।

आपको बता दें कि सिख समुदाय के लोग गोविंद सिंह की जयंती को प्रकाश पर्व के रुप में भी मनाते हैं। इस दिन सिख लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं। गुरुद्वारे को सजाया जाता है, अरदास के साथ-साथ भजन कीर्तन भी करते हैं। गुरुद्वारे में लोग माथा भी टेंकते हैं। गोविंद सिंह ने अपने समुदाय के लोगो में उर्जा जागृत करने के लिए एक लाइन कहा था। जो आज भी काफी प्रचलित है। गोविंद सिंह ने कहा था कि सवालाख से एक लड़ाऊं चिड़ियों सौं मैं बाज लड़ाऊं तबे गोबिंद सिंह नाम कहाऊं। यह लाइन उन्होने उन्होने उस वक्त कही थी जब उनके दो बेटे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम धर्म कबूल न करने पर सरहिंद के नवाब ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया था।

इतना ही नहीं उनके दो बेटे अजीत सिंह और जुझार सिंह चमकौर के युद्ध में अतुलनीय वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गये थे। तब गुरु गोविंद सिंह ने कहा था कि इन पुत्रन के शीश पर वार दिए सुत चार, चार मरे तो क्या हुआ, जीवित कई हजार। विपरीत परिस्थिति में भी उन्होने इस लाइन बोलकर इस्लाम कबूल नहीं किया था।

गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की कहा जाता है कि एक दिन गोविंद सिंह ने एक सभा में मौजूद लोगों से उनका सिर मांग लिया। गुरु गोबिंद सिंह ने कहा कि उन्हें सिर चाहिए। जिसके बाद एक के बाद एक पांच लोग उठे और बोले कि सिर प्रस्तुत है। वो जैसे ही उन्हें तंबू के अंदर ले गए तो वहां से रक्त की धार बह निकली। जिसे देखकर बाकी लोग डर गये।

उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह अकेले तंबू में गए और पांचों युवक को लेकर बाहर निकले तो युवकों ने नए कपड़े, पगड़ी पहने हुए थे। गोबिंद सिंह उनकी परीक्षा ले रहे थे। गुरु गोबिंद ने 5 युवकों को अपना पंच प्यारा बताया और ऐलान किया कि अब से हर सिख कड़ा, कृपाण, कच्छा, केश और कंघा धारण करेगा। यहीं से खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। आपको बता दें कि खालसा का अर्थ हिंदी में शुद्ध होता है।

एसे ही महान गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। अपने बधाई संदेश में सीएम योगी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने समाज को सत्य, न्याय, धर्म और भलाई हेतु प्रेरित किया। गुरु गोविंद सिंह ने जुल्म, अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध आगे बढ़कर नेतृत्व प्रदान किया।

जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को प्रकाश पर्व पर बधाई दी है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी बधाई देते हुए लिखा कि महान कर्मप्रणेता, अद्वितीय धर्मरक्षक, सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व की सभी को अनंत बधाइयां । इसके अलावा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लिखा- गुरु गोबिन्द सिंह जी के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

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