रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: यास का असर ओडिशा और बंगाल में भयंकर रहा। जिस तरह से यहां भीषण तूफान तांडव मचा रहा उससे हाजारों पेड़ और कई कच्चे मकानों को तहस-नहस करके रख दिया है। लगभग 140 किमी प्रति घंटे से तेज हावाएं चल रही हैं और भारी बारिश हो रही है। इससे निपटने के लिए NDRF और SDRFकी टीमें तैनात हैं। जहां वह अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचनाने में लगे हुए हैं।
एक ओर ओडिशा प्रशासन चक्रवात ‘यास’ से जूझ रहा है, तो वहीं दूसरी ओर तटीय राज्य में 300 से अधिक बच्चों का जन्म हुआ। कुछ परिवारों ने अपने नवजात बच्चों का नाम चक्रवाती तूफान के नाम पर ‘यास’ रखा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इनमें से कई बच्चों का जन्म मंगलवार की रात को हुआ था, जब चक्रवाती तूफान देश के पूर्वी तट पर पहुंच रहा था, जबकि कुछ अन्य ऐसे बच्चे भी हैं। जिन्होंने उस समय दुनिया की रोशनी देखी, जब ‘यास’ ने बालासोर जिले से 50 किलोमीटर दक्षिण में बहानागा के पास दस्तक दी।
बालासोर के पारखी इलाके की रहने वाली एक महिला ने कहा कि वह अपने लड़के के लिए ‘यास’ से बेहतर नाम नहीं सोच सकती थीं, जिसका जन्म चक्रवात के आगमन को चिह्नित करता है। इसी तरह, केंद्रपाड़ा जिले की सरस्वती बैरागी ने कहा कि उसने तूफान के नाम पर अपनी नवजात बच्ची का नाम रखा, इस तरह सभी को उसके आने का समय याद रहेगा।
आपको बता दें कि राज्य सरकार ने पहले ही कहा था कि प्रभावित स्थलों से निकाले गए लोगों की सूची में 6,500 गर्भवती महिलाएं हैं, जिन्हें निचले इलाकों और चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों से स्थानांतरित किया गया था। सरकार ने कहा था कि कई महिलाएं, जो अपनी गर्भावस्था के अंतिम चरण में थीं, उन्हें ‘मां गृह’ (डिलीवरी सेंटर) और अन्य स्थानीय अस्पतालों में ले जाया गया।