बड़वानी जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। खेतों की तैयारी और बीज-खाद की व्यवस्था पूरी होने के बावजूद पर्याप्त वर्षा नहीं होने से बुवाई कार्य प्रभावित हो रहा है। जिन किसानों ने शुरुआती बूंदाबांदी के भरोसे मक्का और सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, उनकी फसलें अब नमी की कमी से प्रभावित होने लगी हैं।
जिले में बादलों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन लगातार अच्छी बारिश नहीं होने से खेतों में आवश्यक नमी नहीं बन पा रही है। तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञों ने हल्की बारिश की संभावना जताई है, लेकिन किसानों को व्यापक और नियमित वर्षा का इंतजार है।
कृषि विज्ञान केंद्र तलून में स्थापित स्वचालित मौसम केंद्र पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है। इसके चलते किसानों को स्थानीय स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी और समय पर चेतावनी नहीं मिल पा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम संबंधी आंकड़ों के अभाव में फसल प्रबंधन और कृषि सलाह देना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
मानसून की देरी का असर सिंचाई व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। जिले के कई क्षेत्रों में नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे किसान कुओं, ट्यूबवेल और अन्य जल स्रोतों पर निर्भर हो गए हैं। हालांकि जलस्तर कम होने के कारण इन स्रोतों से भी पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है।
किसानों का कहना है कि कपास, सब्जियों और अन्य फसलों को इस समय पानी की सबसे अधिक जरूरत है। बारिश नहीं होने और सिंचाई संसाधनों की कमी के कारण फसलें सूखने की कगार पर पहुंच रही हैं। किसानों को आशंका है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होगा और आर्थिक संकट गहरा सकता है।

स्थानीय किसानों ने प्रशासन से तलून स्थित मौसम केंद्र को जल्द चालू करने की मांग की है। उनका कहना है कि मौसम की सटीक जानकारी मिलने से कृषि संबंधी निर्णय लेने में सुविधा होगी और नुकसान की आशंका कम होगी।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम केंद्र शुरू होने तक भारतीय मौसम विभाग (IMD) और कृषि विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमानों पर नजर रखें तथा उसी के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।
बड़वानी जिले में कमजोर प्री-मानसून और मानसून की धीमी प्रगति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि बंद पड़े मौसम केंद्र और नहरों में पानी की कमी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। किसान जल्द बारिश और मौसम केंद्र शुरू होने की मांग कर रहे हैं।