रिपोर्ट – माया सिंह
उत्तर प्रदेश : कोरोना महामारी के बीच हुये यूपी चुनाव का परिणाम किसी के लिये खुशी लेकर आया तो किसी के लिये दुख का पहाड़। एक तरफ प्रत्याशी अपने जीत का जश्न मना रहे थे तो दूसरी ओर किसी प्रत्याशी के जीत के बाद भी परिजनों में मातम का माहौल दिखाई दिया । ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के चंदौली से सामने आया है ।
जानकारी के मुताबिक चुनावी परिणाम आने से पहले ही प्रत्याशी की कोरोना से मौत हो गयी । जब रिजल्ट आया तो प्रत्याशी को जीत मिली। इतना ही नहीं 2 मई यानि जिस दिन मतगणना हो रहा था उसी दिन इस प्रत्याशी की बेटी की बारात भी आई हुई थी लेकिन अफसोस प्रत्याशी न तो जीत का जश्न मना सका और नाहि बेटी को विदा कर सका ।
चंदौली जिले के धानापुर ब्लॉक के किशनपुरा गांव का है , जहां 55 वर्षीय वीरेन्द्र उर्फ रामविलास यादव ग्राम प्रधान पद के लिये उम्मीद्वार थे ।
बताया जा रहा है कि सुबह से रामविलास बेटी की शादी की तैयारियों में लगे हुये थे तभी अचानक दोपहर 2 बजे उनकी तबीयत खराब हो गई । परिजनों ने जल्दबाजी में उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया लेकिन हालत ज्यादा गंभीर होने के वजह से वहां के डॉक्टरों ने उन्हें वाराणसी रेफर कर दिया ।
कहा जाता है कि होनी को भला कौन टाल सकता है इस मामले में भी ऐसा ही हुआ डॉक्टरों के तमाम कोशिश के बावजूद ऑक्सीजन लेवल काफी कम होने के काऱण करीब 6 बजे उनकी मौत हो गयी ।
जानकर सभी भावुक हो गये कि उन्होंने दम उसी वक्त तोड़ा जब बेटी की बारात उनकी दरवाजे तक पहुंची । लेकिन परिवार वालों ने उनकी मौत की खबर को रातभर छिपाये रखा और हिम्मत करके बेटी की शादी रचायी , फिर सुबह दुल्हन के साथ बारात को विदा कर दिया ।
परिजनों ने बताया कि शादी में कोई बाधा न आये इसलिये इतनी बड़ी बात छिपायी गई थी और रामविलास की डेड बॉडी को उसी अस्पताल में रातभर छोड़ दिया गया था । हालांकि लड़की को विदा करते ही उनकी लाश को गांव में लाया गया और अंतिम संस्कार विधिवत रूप से किया गया ।