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मेरठ में फिर लगे मकान बिकाऊ के पोस्टर : 22 हजार रुपये गज का है रेट, पूरी गली बिकाऊ है

By: RNI Hindi Desk 
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मेरठ के कंकरखेड़ा में श्रद्धापुरी संतविहार की गली-2 में एक मकान को छोड़कर बाकी सभी मकानों पर बिकाऊ है के पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। दबंगई और गंदगी का आरोप लगाते हुए सभी लोगों ने कह दिया है कि गली में 22 हजार रुपये गज जमीन का रेट है और जो भी मकान खरीदना चाहता है खरीद सकता है। पूरा विवाद एक महिला की डेयरी और उसके द्वारा की जा रही अभद्रता को लेकर है। पिछले चार दिन से इसी बात को लेकर कॉलोनी से लेकर मेरठ के जिला अस्पताल में बवाल भी हो चुका है।
संत विहार कॉलोनी गली-2 में करीब 50 मकान हैं। कॉलोनी में एक मकान को छोड़कर बाकी सभी मकानों पर शनिवार सुबह लोगों ने मकान बिकाऊ के पोस्टर चस्पा कर दिए। पोस्टर पर लिखा था कि दबंगई के कारण मकान बिकाऊ है। हिन्दुस्तान टीम यहां सच जानने के लिए पहुंची। कॉलोनी के लोगों से बातचीत का प्रयास किया। पूछा, यहां मकान बिक्री के लिए बताए थे, लेकिन यहां तो पूरी गली में ही बिकाऊ के पोस्टर चस्पा हैं। लोगों से पूछा कि यहां गली में जमीन का रेट क्या चल रहा है। लोगों ने बताया यहां 22 हजार रुपये गज जमीन का रेट है और बाकी मकान की कीमत लग जाएगी। बातचीत के दौरान लोगों का दर्द छलक आया। उन्होंने कहा कि मकान की एक-एक ईंट खुद लगवाई थी, लेकिन अब मजबूरी में मकान बेचना पड़ रहा है। सभी लोग गली में रहने वाले एक परिवार की दबंगई से परेशान हैं। आरोप लगाया कि यहां महिला डेयरी चला रही है और पीछे वाले मकानों का पानी बंद कर दिया है। ऐसे में पानी निकासी की समस्या बन गई है। विरोध करने पर मारपीट की जाती है।
चार दिन से जारी है बवाल
कॉलोनी में चार दिन पहले इसी परिवार के साथ इस कॉलोनी में रहने वाले यूपी पुलिस के हेड कांस्टेबल और एक अन्य परिवार का विवाद हुआ था। थाने से लेकर जिला अस्पताल तक बवाल हुआ। दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद से पूरी कॉलोनी इस परिवार के खिलाफ है और पूरी गली में मकान बिकाऊ के पर्चे चस्पा कर दिए गए।

एलआईयू और पुलिस टीम पहुंची
मकान बिकाऊ मामले की जानकारी होने पर पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद एलआईयू और पुलिस टीम मोहल्ले में बातचीत करने पहुंची। मोहल्ले के लोगों के बयान भी पुलिस ने दर्ज कराए। पूरे मामले में पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को रिपोर्ट दी गई है। वहीं दूसरी ओर कॉलोनी के लोगों ने भी विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और एसएसपी अजय साहनी को लिखित शिकायत भेजी है।

कब्रिस्तान में रहेंगे सारे लोग
हिन्दुस्तान टीम जब कॉलोनी में पहुंची तो यहां एक ही परिवार के कुछ लोग बैठे मिले। उनसे पूछा कि मकान बेचकर आप लोग कहां जाएंगे। मकान मालिक बोले सभी ने कब्रिस्तान में व्यवस्था कर ली है, चूंकि यहां तो कोई सुनवाई हो नहीं रही है। बताया कि पुलिस भी जांच में सही कार्रवाई नहीं कर रही है। ऐसे में कोई रास्ता नहीं है।

एलआईयू और सीओ से मांगी है रिपोर्ट : एसएसपी 
एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी हुई है। एलआईयू और थाना पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में सीओ दौराला को जांच के लिए भी निर्देश दिया है। पूरे प्रकरण में एसपी सिटी को निगरानी रखने के लिए भी कहा गया है।

हथियार बन गया है मकान बिकाऊ और पलायन के पोस्टर
मकान बिकाऊ और पलायन के बैनर-पोस्टर को अब लोग हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। जब अधिकारियों के सामने कोई मुद्दा रखना हो या सरकार तक बात पहुंचानी हो तो इस हथियार का इस्तेमाल किया जाता है। वेस्ट यूपी में शामली के कैराना में पलायन का मुद्दा देशभर में गरमाने के बाद मकान बिकाऊ और पलायन का लोगों ने इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
मेरठ में पिछले तीन साल में पांच बार पलायन और मकान-दुकान बिकाऊ के बैनर-पोस्टर लगाए गए। सबसे ज्यादा चर्चित मामला प्रहलादनगर का रहा। इसके अलावा 20 मामले अभी तक सामने आ चुके हैं।

कहां-कहां कब लगाए गए पोस्टर
मेरठ
1. सरधना के झटकरी गांव में दो साल पहले नाला निर्माण के विवाद में ग्रामीणों ने पलायन के पोस्टर लगाए थे।
2. एक साल पहले प्रहलादनगर में लोगों ने छेड़छाड़ के विरोध पर पलायन का मुद्दा उठाया था।
3. भावनपुर के गांव गोकुलपुर में दो साल पहले धार्मिक स्थल पर तोड़फोड़ के विरोध के कारण पलायन के पोस्टर लगाए थे।
4.  मेरठ में ही गंदगी को लेकर लिसाड़ी नूरनगर में लोगों ने पलायन के बोर्ड और बैनर-पोस्टर लगाए थे।
5. भावनपुर के गांव में तीन साल पहले संघर्ष के बाद एक बिरादरी के लोगों ने पलायन के बोर्ड लगाए थे।

शामली
पिछले एक साल में जनपद के चार स्थानों पर मकान बिकाऊ या फिर पलायन के पोस्टर चस्पा किए गए।
1- मई माह में झिंझाना थाना क्षेत्र के टपराना गांव में कई परिवारों ने पुलिस पर उत्पीड़न, घरों में तोड़फोड़ और मारपीट का आरोप लगाते हुए मकानों पर पलायन के पोस्टर चस्पा किये थे। पुलिस गांव में जिला बदर गोतस्कर को पकड़ने गई थी, जिसपर लोगों ने हमला कर दिया था।
2-जुलाई में कैराना कस्बे में मीट प्लांट से उठने वाली दुर्गंध को लेकर कई परिवारों ने मकान बिकाऊ और पलायन के पोस्टर लगाए थे। अधिकारियों की टीम ने मीट प्लांट का निरीक्षण किया था।
3- अगस्त में हसनपुर गांव में ब्राह्मण समाज के कई परिवारों ने पलायन के पोस्टर चस्पा किये थे। पबजी खेलने के दौरान बच्चों के विवाद के बाद हुई थी फायरिंग।
4- जून में शामली शहर में गन्ने के वाहनों से लगने वाले जाम से परेशान लोगों ने मकानों पर पलायन के पोस्टर चस्पा किए थे। इनमे पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल का परिवार भी शामिल था।

बागपत
1. अगस्त में बड़ौत के गुराना रोड की गली नंबर 8 में मकान बिकाऊ है के पोस्टर चस्पा किए गए थे। गांजा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लोगों में गुस्सा था।
2. दोघट थानाक्षेत्र के गांगनौली गांव में कुछ ग्रामीणों ने मकान बिकाऊ के पोस्टर चस्पा किए। ग्रामीणों का आरोप था पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में प्रवीण गांगनोली को गिरफ्तार किया है और आए दिन पुलिस उत्पीड़न करती है।

बिजनौर
बिजनौर में दो मामले सामने आए
1. जनवरी में जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर धामपुर के गांव गजापुरा में परिवार ने अपने मकान पर पोस्टर चस्पा किए।
2. पिछले माह अगस्त में थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव नरैनी में परिवार ने बेटियों के साथ छेड़छाड़ से तंग आकर मकान बिकाऊ है लिखकर पलायन का अल्टीमेटम दिया था।

मुजफ्फरनगर
डेढ़ माह पूर्व मुजफ्फरनगर के तितावी थानाक्षेत्र के ग्राम धौलड़ा में चकबंदी के विरोध में कुछ लोगों ने पलायन की चेतावनी देते हुए पोस्टर चस्पा किए थे। उनका आरोप था कि राजनीतिक दबाव में चकबंदी के अधिकारियों ने कीमती जमीन को दूसरे लोगों को दे दिया।

सहारनपुर
1. जुलाई में गंगोह के गांव दुधवा निवासी संजय सर्राफ ने लाखों की लूट के बाद गंगोह से पलायन कर दिया था। पुलिस द्वारा 10 दिन बाद भी लूट का खुलासा न करने पर अपने मकान को भी कम दामों में बेच डाला।
2. 10 अगस्त को गांव मोहरा निवासी मास्टर प्रेम सिंह ने गांव निवासी युवक पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया था। पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर प्रेम सिंह गांव से पलायन कर गए और परिवार सहित गांव गांधीनगर आकर बस गए।
3. चिलकाना के अब्दुल्लापुर गांव के प्रधान प्रवीण कुमार ने दबंगों के चलते गांव से पलायन कर दिया था और परिवार समेत पुलिस लाइन पहुंच गया था। हालांकि पुलिस के समझाने के बाद वह गांव लौट गया था।

बुलंदशहर
1. वर्ष 2019 में चांदपुर रोड पर छेड़छाड़ का विरोध करने पर दलित महिलाओं को कुचलने के मामले में पीड़ित परिवार ने न्याय न मिलने पर पलायन की चेतावनी दी थी।
2. एक साल पहले चांदपुर रोड पर नाबालिग छात्रा को अगवा कर गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई। कार्रवाई न होने से क्षुब्ध परिजनों पलायन कर गए। हालांकि जब पुलिस ने कार्यवाही कर दी तो पीड़ित परिवार वापस आ गया।

हापुड़
15 दिन पहले ही मोबाइल टावर का विरोध करते हुए कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ले में घरों के बाहर पलायन के पोस्टर लगाए गए थे।

 

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