नगर के जर्जर हो चुके शास्त्री सेतु की मरम्मत का कार्य शुक्रवार से शुरू हो गया है। पीडब्लूडी के इंजीनियरों ने मरम्मत के मद्देनजर पुल पर से बड़े वाहनों का संचालन रोक लगा दिया है। पुल के मरम्मत का कार्य शुरू कराए जाने पर ट्रक आपरेटर एसोसिएशन के सदस्यों ने खुशी जताई है। उन्हें आशा है कि इस पुल से बड़े वाहनों का आवागमन माह-दो माह के बाद शुरू हो जाएगा। इससे डीजल पर होने वाले अतिरिक्त खर्च पर नियंत्रण कर लिया जाएगा। अभी गिट्टी लदे ट्रकों का संचालन वाराणसी से गोरखपुर और जौनपुर के लिए किया जा रहा है। इससे डीजल केक साथ ही टोल टैक्स भी चुकाना पड़ रहा है।जिले को कई जनपदों से जोड़ने वाला शास्त्री पुल करीब चार वर्ष से जर्जर हो गया है। पुल के दो पिलर कमजोर हो गए है। इससे बड़े वाहनों का संचालन चार वर्षों से इस पुल पर रोक दिया गया है। बड़े वाहनों का संचालन रोक दिए जाने से सर्वाधिक क्षति खनन व्यवसाय और ट्रक आपरेटरों को हुई। गिट्टी लदे वाहनों को जौनपुर, भदोही और पूर्वांचल के अन्य जिलों को भेजने के लिए वाराणसी से किया जा रहा था। इससे डीजल के साथ ही टोल टैक्स भी देना पड़ रहा था। बीते जनवरी माह में जिले में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने पुल के मरम्मत के लिए नौ करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। उन्होने हाल ही में तीन करोड़ रूपये कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को भेज दिया। धन मिलते ही पीडब्लूडी ने सेतु के मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया। पुल से बड़े यात्री वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। पुल के मरम्मत में जुटे इंजीनियरों का कहना है कि सभी पिलरों पर लगे बेयरिंग को बदला जाएगा। सभी ज्वाइंट की मरम्मत की जाएगी। इसके अलावा केबिल भी बदली जाएगी। पुल के स्लैब के अंदर स्टील के वायर की केबिल भी डाली गई है। यह पुल के संतुलन को बनाए रखती है।