घाघरा के जलस्तर तेजी से घटने के कारण नदी खतरा निशान से 90 सेमी नीचे बह रही है। जिससे नगर सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है। गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर शनिवार को 69.15 मीटर रहा। जबकि रविवार को 15 सेंमी घटकर जलस्तर 69.00 मीटर हो गया। इस तरह नदी का जलस्तर बीते चौबीस घंटे में 15 सेमी घटा है जो कि खतरा निशान से नदी खतरे के निशान से 90 सेमी नीचे हो गयी है। नदी के घटने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। कटान शुरू होने की संभावना से लोग दहशत में हैं। नदी कभी भी बढ़ सकती है नदी के घटने व बढ़ने का क्रम जारी है। वही रामघाट पर रेत पड़ने से नगर में खुशी का माहौल है।
घाघरा के लगातार घटते जलस्तर से तटवर्ती इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन नवली गांव के समीप नदी की तेज धारा उपजाऊ भूमि को काट रही है। बाढ़ खण्ड के एक्सीयन दीपक कुमार ने बताया कि नवली गांव को बचाने के लिये पूरी तैयारी में है। कटान न हो इसके लिये कटान के मुहाने पर पहले ही बोल्डर की पिचीग की गयी। जबकि नवली गांव तीसरी बार बसाया गया है। दो बार यह गांव नदी की धारा में कटकर विलीन हो गया है। यहीं पर बाढ़ चौकी भी स्थापित की गयी है जो नदी के रूख़ की खबर पल पल देती रहे इधर महुला गढवल से लेकर रामपुर धनौली रिंग बन्धों की सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात किये गये हैं तथा जहां भी बरसात से बन्धों की मिट्टी धुल गयी है। वहां मजदूरों को लगाकर बन्धों को दुरूस्त किया जा रहा है। बीबीपुर बेलौली रिंग बन्धो का निरीक्षण करते हुए एक्सीयन बीरेन्द्र पासवान ने बताया कि बन्धो की ऊँचाई इस बार बढ़ाया गया है, जिससे बन्धों को लेकर खतरा नहीं है।
पानी घटते ही कटान शुरू, धंस रहे सुरक्षा में लगे बोल्डर
कोरौली। हिन्दुस्तान संवाद
घाघरा नदी के जलस्तर में प्रतिदिन घट रहे जलस्तर से एक तरफ जहां बाढ़ का खतरा टल गया है तो वही तटवर्ती क्षेत्रो में कटान तेज हो गई है। क्षेत्र के नवली, नईबजार, बेलौली, रामपुर धनौली, सरहरा सहित आदि स्थानों पर नदी की लहरें भीषण कटान कर रही है। बन्धों पर सुरक्षा के लिए लगाए गए बोल्डर ही अब नदी में धंसेन लगे हैं। तेज कटान देख सिचाई विभाग के हाथ पैर फूल रहे है। नदी की प्रबल धारा बन्धों पर दबाव बना रखा है। इससे लोगों में अफरातफरी का आलम है।
बाढ़ का पानी कम होते ही बंधे में लगे सभी रेगुलेटर खोल दिए गए हैं। इससे गांवों में पसरा बाढ़ का पानी खिसकर वापस धीरे धीरे नदी में जाने लगा है। इससे ग्रामीणों को राहत तो जरूर मिली है, मगर उनकी पूरी फसल सड़कर चौपट हो चुकी है। नदी की बैरोलेकिंग के चलते नीचे से बोल्डर नदी में विलीन होते जा रहे हैं। इसके साथ ही साथ बीबीपुर बेलौली बंधा के निचले इलाके में भी नदी दबाव बनाए हुए है। सिचाई विभाग ने कटान का खतरा रोकने के लिए बंधे के किनारे झाड़ियों को डालना शुरू कर दिया है ताकि नदी की धारा झाड़ियों से टकराकर वापस चली जाय और बंधा सुरक्षित रह सके। जलस्तर घटने के बाद भी लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई है। नवली के पश्चिम तरफ समीप नदी कटान कर रहे हैं। क्षेत्र के हरधौली, लामी, कादीपुर, तारनपुर,गोड़ौली, चकभगवान दास, मोहम्मदाबाद सिपाह सहित दर्जनों गांवो में आई बाढ़ का पानी सड़कों से निकल चुका है लेकिन गंदगी बरकरार है। नालियां जाम हैं, संक्रामक रोग फैलने का भय बना हुआ है। गांवों से चारों तरफ से बाढ़ का पानी हटने के साथ ही गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ग्राम पंचायत व स्वास्थ्य विभाग द्वारा शीघ्र सफाई कर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं किया तो संक्रामक रोग फैल सकता है।