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ताल से निकल रही लकड़ियों का राज, जांच में वन रक्षक पर गिर गई गाज

By: RNI Hindi Desk 
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ताल से निकल रही लकड़ियों का राज, जांच में वन रक्षक पर गिर गई गाज

कैम्पियरगंज वन क्षेत्र में सरूआ ताल ने लगातार तीसरे दिन लकड़ियां उगलना जारी रखा है। डीएफओ अविनाश कुमार की मौजूदगी में गहरे पानी से एक-एक कर सागौन एवं साखू के 19 बोटे निकाले गए। वन माफियाओं के मिली-भगत के आरोप में डीएफओ ने वन रक्षक भुआल मौर्या को निलंबित कर दिया गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के गोरखपुर वन प्रभाग के डीएफओ अविनाश कुमार के निर्देशन में लगातार तीसरे दिन भी सरुआ ताल में वन तस्करों द्वारा डूबोई गई लकड़ियों को निकालने की कार्रवाई की गई।

डीएफओ ने स्टीमर पर स्वयं सवार होकर 12 फीस से ज्यादा गहराई में छुपा कर रखे गए जंगल से काटी गई लकड़ियों के बोटे तलाश लिए। तकरीबन 20 की संख्या में स्टॉफ, गोताखोर एवं मजदूरों के साथ उन्होंने दिन ढलने तक 19 बोटा लकड़ी गहरे पानी से निकाल कर किनारे पहुंचवाया। दूसरी ओर रात में वन माफियाओं द्वारा लकड़ी निकालने या उन्हें पानी में दूसरे स्थान पर छिपा देने की गुप्त सूचना के बाद मौके पर ही स्टाफ के साथ डेरा डाल लिए हैं।

उधर वन माफियाओं से मिली भगत के आरोप में डीएफओ ने एक फारेस्ट गार्ड (वन रक्षक) भुआल मौर्या को निलंबित कर दिया है। उनके इस कदम से वन तस्करों के साथ रिश्ता रखने वाले दूसरे वन कर्मियों के भी होश उड़ हुए हैं। डीएफओ के सख्त तेवर और माफियाओं के दबाव के बीच उनके सख्त रवैये ने सभी के होश उड़ा रखे हैं। माना जा रहा है कि वन तस्करों के साथ मिलीभगत के आरोप में कुछ और वन कर्मियों पर गाज गिर सकती है। फिलहाल शुक्रवार और गुरुवार को भी ताल से जंगल से काट कर ताल में छुपाई गई कीमती लकड़यिां निकाली गई थीं।

मास्टर माइंड पर कसने लगा है शिकंजा, खुलने लगी हैं लकड़ी कटान की परते

कैम्पियरगंज रेज में जंगल से सटे सरूआ ताल एवं परगापुर ताल से सटे क्षेत्रों में जंगल की लकड़ी की तस्करी का खेल कोई नया नहीं है। नया है तो यह कि पहली बार इतनी सख्ती और शिद्दत से कार्रवाई हो रही है। बाढ़ के सीजन में यहां 10 के करीब वन माफिया सक्रिय हो जाते हैं लेकिन इन्हें संरक्षण सिर्फ एक व्यक्ति मुहैय्या कराता है। इस व्यक्ति पर वन विभाग ने 2017-18 में गैंगेस्टर की कार्रवाई भी किया था लेकिन सिर्फ तीन माह बाद ही जेल से वह बाहर आ गया। उसके बाद दूसरे वन माफियाओं पर उसका सिक्का जम गया।

बाढ़ के सीजन में वह संसाधनों के अभाव से जूझ रहे वन विभाग की मजबूरियों का फायदा उठा अपने राजनीतिक पकड़ के बल जंगल में वारदात करता है। जंगल की लकड़यिां काट बोटा बना ताल के पानी में डूबा देता है।  वन कर्मियों पर दबाव बनाने के लिए स्वयं ही आरटीआई के जरिए जंगल की अवैध कटान की जानकारियां भी मांगता है। उसका संगठित गिरोह पुलिस और वन विभाग में भी पैठ बनाए हुए है। इस माफिया के ऊपर वन विभाग ने कैम्पियरगंज और फरेंदा में कई मुकदमें दर्ज कराए हैं। वन माफिया पत्नी के नाम से लकड़ी के फर्नीचर का काम और आरा-मशीन भी संचालित करता है। वन विभाग की निगाह उसके आरा मशीन पर भी है जहां सही लकड़यिों के बीच में जंगल से चोरी से काटी गई लकड़यिां भी चीर कर बेच दी जाती हैं।

मछली के ठेके की ओट में जंगल की कटान

इस वन माफिया के संगठित गिरोह की जड़े इतनी गहरी हैं कि वह मत्स्य पालन विभाग से सरुआ ताल से समितियों के जरिए मछली मारने का ठेका भी लेता है। उसी ठेके की आड़ में जंगल की लकड़यिां काट नाव की मदद से पानी में लकड़यिों को तैरा कर उनका परिवहन करते हैं। जब सख्ती होती है तो बोटा बना कर ताल में डूबो देते हैं। वन विभाग अब मत्स्य पालन विभाग से मिल कर उनका ठेका रद्द कराने की अपील भी करेगा।

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