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गरीबी और बेबसी ने ले ली गोरखपुर के कैंसर पीड़ित छात्र की जान

By: RNI Hindi Desk 
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गरीबी और बेबसी ने ले ली गोरखपुर के कैंसर पीड़ित छात्र की जान

गोरखपुर के पीपीगंज कस्बे में रहने वाला एक छात्र मंगलवार को असमय काल के गाल में समा गया। प्रकृति ने पहले उस पर बज्रपात किया। इतनी कम उम्र ही उसे ब्लड कैंसर हो गया। परिवारीजनों ने अपने सामर्थ्य पर उसका इलाज कराया। बेबस होने लगे तो जन प्रतिनिधियों को आपबीती सुनाई। सोशल मीडिया पर गुहार लगाई।  स्थानीय विधायक ने बात सीएम तक पहुंचाई। सीएम ने 24 घंटे के अंदर इलाज का खर्च वहन कराने की आश्वासन दिया। परिवारीजन किशोर को इलाज के लिए एम्बुलेंस से लखनऊ ले जा रहे थे लेकिन रास्त में उसने दम तोड़ दिया।

नगर पंचायत पीपीगंज  के वार्ड नम्बर 8 निवासी झिनकू लाल जायसवाल मेहनत-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे। उनकी पहली पत्नी से एक बेटा और एक बेटी है। उनकी पहली पत्नी की मौत के बाद उसके बेटे व बेटी गोरखपुर में अलग रहते हैं। पहली पत्नी की मौत के बाद झिनकूलाल ने दूसरी शादी कर ली। उनकी दूसरी पत्नी से तीन पुत्र और एक पुत्री पैदा हुई। इसमें रितिक सबसे छोटा था। वह बापू इंटर कालेज में कक्षा नौ का छात्र था। कुछ महीने पहले रितिक की तबीयत खराब हो गई।

उसे गोरखपुर दिखाया गया जहां चिकित्सकों ने कैंसर की आशंका जताई। रितिक को परिवारीजनों ने केजीएमसी में दिखाया। तबीयत काफी बिगड़ गई। रितिक को 15 दिन पूर्व उसे वही भर्ती किया गया। जांच के बाद पता चला कि रितिक को ब्लड कैंसर है। डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय से इलाज नहीं हुआ तो संकट पैदा हो सकती है। उन्होंने रितिक के इलाज पर 6 लाख रुपये का खर्च बताया।

सोशल मीडिया पर मांगी मदद की गुहार
रितिक का उसके परिवारीजन इलाज कराते रहे। आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई तो उसे लेकर पीपीगंज लौट आए। झिनकू लाल ने पैसे के इंतजाम में लोगों से मदद मांगी। रितिक की बीमारी और खर्च सम्बंधी विवरण और फोटो सोशल मीडिया पर डालकर मदद की गुहार लगाई। चेयरमैन गंगा प्रसाद जायसवाल ने इसकी जानकारी विधायक फतेह बहादुर सिंह को दी। विधायक ने तत्काल मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर रितिक के इलाज के लिए धन उपलब्ध कराने की मांग की। मुख्यमंत्री ने दो दिन के भीतर धन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था।

एम्बुलेंस से ले जा रहे थे लखनऊ, रास्ते में दम तोड़ा
इस बीच रितिक की तबीयत अचानक खराब हो गई। इसकी जानकारी मिलने पर विधायक ने मंगलवार की दोपहर एम्बुलेंस से उसे लखनऊ भेजने की व्यवस्था कराई। आश्वस्त किया कि भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर अस्पताल को धन अवमुक्त हो जाएगा। इसके बाद परिजन रितिक को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गए थे। बरगदवा तक जाते ही रितिक ने दम तोड़ दिया। पीपीगंज व्यापार मंडल के सदस्यों को रितिक की बीमारी की जानकारी थी। व्यापारियों ने अपने तई रितिक की मदद भी की लेकिन वह नाकाफी थी।

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