सोलह सूत्रीय मांग लेकर शनिवार को जिला मुख्यालय पहुंचे उत्तर प्रदेश किसान सभा के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री को संबोधित पत्रक डीएम को सौंप चेताया कि शीघ्र मांग पूरा नहीं हुआ तो किसान सभा हर स्तर से आवाज उठाने को बाध्य होगा।
इस दौरान इंद्रदेव पाल ने कहा कि रेलवे, बिजली, टेलीबीजन व बैंक में हो रहा निजीकरण न किया जाए। डीजल-पेट्रोल के बढ़े दाम को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। देश में सबसे ज्यादा महंगा बिजली यूपी में है जिसे कम किया जाए। बेतहासा बढ़ रही महंगाई पर नियंत्रण लगाया जाए। गैर आयकर दाताओं के खाते में 7500 रुपया छह माह तक आर्थिक सहायता के रुप में दिया जाए। नया मंडी कानून को खत्म किया जाए। कोरोना वायरस से बढ़ी बेरोजगारी को देखते हुए बच्चों का फीस व बिजली बिल माफ किया जाए। यूपी में अपराध बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना अत्यंत जरुरी है। कहा कि छुट्टा मवेशी फसलों को चौपट कर किसानों की कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं। अन्नदाताओं की समस्या को देखते हुए आवारा पशुओं को गौशाला में रखा जाए। मनरेगा श्रमिकों को दो सौ दिन काम मिलना चाहिए। साथ ही छह सौ रुपया की दर से देहाड़ी दिया जाए। कोरोना वायरस मरीजों की जांच नि:शुल्क कराया जाए। औराई में बंद पड़े सहकारी चीनी मिल को शीघ्र चालू कराया जाए। महिलाओं, गरीबों संग किसी तरह का अत्याचार किया गया तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर कैलाशनाथ बिंद, सुक्खूराम पाल, जगन्नाथ मौर्य, परदेशीराम, बेचूलाल आदि मौजूद थे।