बुरहानपुर : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ग्राम घाघरला और डालमहू के बीच स्थित पुल एक बार फिर उफनते नाले में तब्दील हो गया है। शुक्रवार शाम तेज बारिश के बाद पुल के ऊपर से पानी बहने लगा, जिससे आवागमन बाधित हो गया। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर पुल पार करने को मजबूर दिखे। यह नजारा किसी बड़े हादसे की आशंका को साफ तौर पर दर्शाता है।
हर बरसात में बनते हैं बाढ़ जैसे हालात
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या वर्षों पुरानी है। बरसात के मौसम में जैसे ही बारिश तेज होती है, पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है और घाघरला, डालमहू समेत आसपास के कई गांवों का संपर्क घंटों के लिए टूट जाता है। सड़क बनने के बावजूद पुल की ऊंचाई कम होने के कारण स्थिति हर साल गंभीर हो जाती है।

स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी
ग्रामीण हरिओम ने बताया कि पानी बढ़ने पर लोगों के सामने दो ही विकल्प बचते हैं—या तो घंटों पानी उतरने का इंतजार करें या फिर अपनी जान जोखिम में डालकर पुल पार करें। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
पांच फीट ऊंचा पुल ही बनेगा स्थायी समाधान
ग्रामीण नेमीदास का कहना है कि यदि पुल की ऊंचाई लगभग पांच फीट बढ़ा दी जाए तो बारिश का पानी आसानी से नीचे से निकल सकेगा और पुल पर जलभराव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। उनका कहना है कि मौजूदा पुल कई दशक पुराना और जर्जर हो चुका है। नए सड़क मार्ग का निर्माण तो किया गया, लेकिन पुराने पुल का पुनर्निर्माण नहीं किया गया, केवल मरम्मत कर उसे उपयोग में रखा गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की नए पुल की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुराने पुल के स्थान पर नया, मजबूत और अधिक ऊंचाई वाला पुल बनाया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल
उफनते नाले के बीच जान जोखिम में डालकर पुल पार करते ग्रामीणों की तस्वीरें विकास और सुरक्षा संबंधी दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। हर वर्ष दोहराई जाने वाली यह समस्या अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि लोगों की जान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होगा और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाएगी.