मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की प्रमुख जल परियोजनाओं, सिंचाई विस्तार और भविष्य की रणनीतियों की विस्तृत जानकारी दी।
मंत्री सिलावट ने मध्य प्रदेश को “नदियों का मायका” बताते हुए कहा कि प्रदेश में 260 नदियाँ और 702 छोटी जलधाराएँ हैं, जो चारों दिशाओं में प्रवाहित होती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों से अगले एक वर्ष में प्रदेश का सिंचाई रकबा बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा और वर्ष 2028 तक मध्य प्रदेश एक “बड़ी जल शक्ति” के रूप में देश में अपनी पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने कच्ची नहरों को पक्का करने, माइक्रो सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित करने और जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश को मिले राष्ट्रीय सम्मानों का भी उल्लेख किया।
जल संसाधन मंत्री ने दौधन बांध परियोजना को प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी जल योजनाओं में से एक बताया। इस परियोजना की कुल लागत 44,605 करोड़ रुपये है, जिसमें मध्य प्रदेश का अंश 24,293 करोड़ रुपये निर्धारित है।
इस परियोजना से 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और 10 जिलों के लगभग 7.25 लाख किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 44 लाख लोगों को पेयजल सुविधा, 103 मेगावॉट जल विद्युत और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि इससे भूजल स्तर में सुधार, औद्योगिक विकास, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने बताया कि 25 दिसंबर 2024 को नरेंद्र मोदी ने खजुराहो में इस परियोजना का भूमिपूजन किया था। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। प्रभावित 22 गांवों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज भी घोषित किया गया है।
मंत्री सिलावट ने राष्ट्रीय महत्व की पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना पर भी प्रकाश डाला। 72 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 35 हजार करोड़ रुपये है।
इससे 6.16 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता विकसित होगी, जबकि चंबल नहर के आधुनिकीकरण से अतिरिक्त 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। इस परियोजना से मालवा और चंबल अंचल के 13 जिले सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ को लेकर मंत्री ने कहा कि क्षिप्रा नदी को निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए 2,396 करोड़ रुपये की लागत से चार प्रमुख कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ और पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है।
इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से बीमारी फैलने के मामले पर मंत्री सिलावट ने स्पष्ट किया कि जल आपूर्ति की जिम्मेदारी नगर निगम की है और जल संसाधन विभाग का इससे कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार जल प्रबंधन को लेकर दीर्घकालिक, वैज्ञानिक और बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। सिंचाई विस्तार, पेयजल उपलब्धता, ऊर्जा उत्पादन और धार्मिक आयोजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाई जा रही ये योजनाएं किसानों, आम नागरिकों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को आने वाले वर्षों में बड़ा लाभ पहुंचाएंगी।