रिपोर्ट – माया सिंह
मिस्र के एक कॉलेज के छात्र को यह अंदाजा भी नहीं था कि जेंडर स्टडीज करने की वजह से सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा। दरअसल , ऑस्ट्रिया की सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी और एंथ्रोपोलॉजी के छात्र अहमद को रिसर्च करना भारी पड़ गया । इस विषय पर रिसर्च करने के चलते दुनिया की सबसे खतरनाक जेल में उसे डाल दिया गया है ।
अहमद की गर्लफ्रेंड सोहेला जो कि बेल्जियम में रहकर पढ़ती है और दोनो लॉन्ग रिलेशनशिप में रह रहे हैं । सोहेला का कहना है कि अहमद के एक दोस्त को मिस्र में ही गर्भपात के भयानक दौर से गुजरना पड़ा था । वो अपनी दोस्त की आपबीती से काफी भावुक हो गया था , इसके बाद से ही अहमद ने इसपर रिसर्च करने का फैसला लिया ।
आगे सोहेला ने बताया कि अहमद ने इमोशनल होकर फैसला लिया था कि वो अपनी मास्टर्स की रिसर्च मिस्र और इस्लाम के गर्भपात के कानूनों की तुलना पर करेगा । तब उसने सोचा भी नहीं था कि महज एक रिसर्च करना उसके लिये इतना खतरनाक साबित होगा ।
उन्होंने कहा कि अहमद जब ऑस्ट्रिया से वापस मिस्र आ रहा था तो शेरम अल शेख इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उसकी जेंडर स्टडीज की किताबों को लेकर अधिकारी पूछताछ करने लगे । हालांकि पुछताछ करने के बाद उस वक्त उसे छोड़ दिया गया लेकिन कुछ दिन बाद ही पुलिस उसके घर पर आकर गिरफ्तार कर लिया औऱ उसे कायरो में स्थित लिमान टोरा जेल में बंद कर दिया ।
बता दें कि इस जेल की नियम काफी सख्त है । इसमें मौजूद कैदियों का बाहरी दूनिया से कोई संपर्क नहीं होता है । लेकिन बीते कुछ महीनों से नियम में थोड़े बदलाव हुये है महिना में एक बार अहमद की फैमिली उससे मिल सकती है मगर सोहेला नहीं मिल सकती क्योंकि उसकी शादी अभी अहमद से नहीं हुई है । हालांकि बाहर से सोहेला अहमद को रिहा कराने के लिये तमाम कोशिश कर रही है ।