रिपोर्ट – माया सिंह
नई दिल्ली : कोरोना वायरस ने देशभर में तबाही मचा रखा है । कोरोना से जंग में ऐसी भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं कि देखकर आपकी रूहं कांप जाएगी। कहीं संक्रमित पति की जान बचाने के लिए पत्नी की जद्दोजहद है तो कहीं पिता के अंतिम संस्कार के लिए बेटे की जंग देखने को मिल रही है । देश में इस वक्त चारों ओर इलाज से लेकर अंतिम संस्कार के लिये हाहाकार मचा हुया है ।
इस महामारी के दूसरी लहर में एक तरफ कोरोना संक्रमण का डर तो दूसरी तरफ लोगों के सामन एक नई समस्या खड़ी हो गयी है । परिजन कोरोना के बढ़ते मामलों और लॉकडाउन के चलते अस्थियां को तुरंत विसर्जित करने की रसम भी अदा नहीं कर पा रहे हैं।
आलम यह है कि श्मशान घाट में रखी आलमारियों के लॉकरों में जगह नहीं होने के कारण कोविड श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के प्रबंधक परिवारों को स्थानीय मंदिरों या गुरुद्वारों में अस्थियां रखने की सलाह दे रहे हैं।
उनका कहना है कि अधिक अस्थि कलश रखने के लिये प्रबंध समीति ने नई आलमारियां मंगवाई थी लेकिन रोजाना हो रहे दाह संस्कार की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वे भी अब भर गये है ।
जानकारी के मुताबिक कोरोना महामारी से पहले निगम बोध घाट पर 228 लॉकर थे, जहां परिवार एक या दो दिन के लिए हरिद्वार या काशी ले जाने से पहले कलश रख सकते थे। अब उन लॉकरों में भी कलश रखने की जगह नहीं बचे हैं ।
समिति प्रबंधक मृतकों के रिश्तेदारों को उनकी कारों या स्थानीय मंदिरों में कलश रखने के लिए कह रहे हैं। वहीं एक अधिकारी ने कहा कि हमने 70 और ट्रे का ऑर्डर दिया है। लेकिन ये भी कहीं जल्दी भर न जाये इस लिहाज से अंतिम संस्कार के घाट पर अस्थि को रखने का समय भी कम कर दिया गया है औऱ परिवारों को अंतिम संस्कार के दिन ही कलश अपने साथ ले जाने को कहा जा रहा है।