रिपोर्ट: सत्यम दुबे
गोरखपुर: कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया। तो कई को बीच सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। लोगो के हालात ये हो गये कि घर-जमीन बेचकर भी अपनों के नहीं बचा पाये। ऐसा ही एक दुखभरी घटना यूपी के गोरखपुर से सामने आई है। जहां पत्नी ने अपने पति के इलाज कराने के लिए सारे गहने तक गिरवी रख दिए। बावजूद इसके वह अपने पति को नहीं बचा पाई। हद तो तब हो गई जब उसे अंतिम संस्कार कराने के लिए उधार पैसा लेना पड़ गया।

आपको बता दें कि यह दुखद घटना रेखा श्रीवास्तव नाम की एक महिला के साथ घटी, जो कि अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी गोरखपुर में रहती थी। लेकिन कोरोना महामारी को शायद यह खुशी मंजूर नहीं थी। 20 अप्रैल को उसके पति अमरेंद्र की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिसके कुछ देर बाद अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। महिला ने दो दिन तक अपनी 8 साल की बेटी और 12 साल के बेटे के साथ दर-दर भटकती रही। लेकिन किसी भी अस्पताल में उसके पति के लिए कोई बेड नहीं मिला।
काफी प्रयास के बाद महिला को 22 अप्रैल को एक निजी अस्पताल में बेड मिल गया। हॉस्पिटल वालों ने उसे 50 हजार रुपए जमा करने का कहा। बाद में उनसे 70 हजार रुपए वसूले गए। इसके बाद भी उसे वेंटिलेटर नहीं मिला। इस तरह महिला ने अपने पति को ठीक करने के लिए सारे जेवर बेचकर डेढ़ लाख रुपए खर्च कर दिए। लेकिन फिर उसे निराशा हाथ लगी। अस्पताल ने तीसरे दिन पति की लाश उसे दे दी।
अस्पताल मे जब उसके पति की लाश उसको सौंपी तो, उनको अपने पति के शव को श्मशान ले जाने के लिए कोई गाड़ी नहीं मिली। एक एंबुलेंस वाले ने 10 हजार रुपए लिए तब कहीं जाकर वह शव ले जाने के लिए तैयार हुआ है। रेखा को श्मशान घाट पर 2 हजार की लकड़ी 5 हजार में मिली। इसके बाद मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार करने वाले ने भी 8 हजार रुपए लिए, तब कहीं जाकर अंतिम संस्कार किया।
अपने साथ घटी इस घटना के बाद रेखा श्मशान में ही रोने लगी और कहने लगीं कि अब पता चला कि कोरोना के नाम पर कैसे लूटा जा रहा है। यह मैंने पहली बार देखा कि इंसान पैसे के लिए कितना गिर गया है। भगवान के घर जाकर इन सबको हिसाब देना होगा।