ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी के चलते भारत की चावल इंडस्ट्री खतरे में पड़ गई है। जिसका असर एशिया की सबसे बड़ी बासमती चावल की मंडी तरावडी पर भी असर देखने को मिला। भारत से 75 प्रतिशत बासमती चावल ईरान और उनके पड़ोसी देशों को निर्यात होता है ऐसे में करीब 30 हजार करोड़ रुपये की भारत की चावल इंडस्ट्री खतरे में है।
ईरान, इराक, सऊदी अरब, दुबई, सीरिया और यमन जैसे देश भारतीय बासमती चावल के बड़े खरीददार हैं, लेकिन अमेरिका से ईरान के खराब संबंधों का सीधा खामियाजा भारतीय राष्ट्रीय सिटी को भुगतना पड़ रहा है। भारत का बासमती चावल खाड़ी देशों में काफी मांग रखता है, ऐसे में इंडियन राइस इंडस्ट्री के हजारों करोड़ रुपए भी वहां अटके हुए हैं।
शिव शक्ति इंटर गलोब एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के एमडी अमन गुप्ता का कहना है कि सरकार को व्यापारियों के हजारों करोड़ रुपए इरान से दिलवाने के लिए प्रयास करने चाहिए, ताकि पहले से मंदी की मार झेल रही इंडस्ट्री को बचाया जा सके।
वहीं दूसरी ओर हरियाणा राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेल सिंगला ने कहा कि ईरान के साथ अमेरिका की तनातनी से भारत में हजारों लोगों के रोजगार पर तलवार लटक गई है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान में जल्द ही माहौल ठीक नहीं होता पूरा इस इंडस्ट्री के लिए खुद को खड़े रख पाना काफी मुश्किल होगा।