रिपोर्ट: गीतांजली लोहनी
भोपाल: मोबाइल फोन जितना लाभदायक है उतना ही विनाश का कारण भी। जी हां मोबाइल फोन के कारण घरों में रिश्तें टूटने की खबर लगातार सामने आ रही है। मोबाइल फोन रिश्तों को बनने के पहले ही बिगाड़ रहा है। शादी होकर लड़की ससुराल पहुंचती है, तो सबसे ज्यादा बात वह अपने मायके वालों से और अपनी मां से करती है। पति और ससुराल की हर बात वो अपनी मां से फोन में शेयर करती है। मायके वाले उसको ज्यादा से ज्यादा अधिकार संपन्न बनाने और ससुराल वालों को अपनी उंगलियों में नचाने के नुस्खे देते रहते है। जिसके कारण नव दंपति के बीच में भी वो रिश्ता नहीं बन पाता जो एक पति-पत्नि के लिए जरुरी होता है।
इसके साथ ही पत्नि के रुप में शादीशुदा लड़की अपना घर भी नहीं बसा पाती है कि तलाक की नौबत आ जाती है। इस तरह के कई मामले देखे गये है और ऐसे मामलों में काउंसलर की भूमिका भी कोई असर नहीं कर पा रही है।
दरअसल, भोपाल की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में काउंसलिंग के दौरान अभी तक हजारों प्रकरणों में यह तथ्य सामने आए हैं कि शादी के बाद भी मायके वाले अपनी लड़की के लगातार संपर्क में रहते है। दिन-भर में कई बार बात करते है, हर छोटी बड़ी बातों में मां का हस्तक्षेप होने से शादी कर नए घर में आई लड़की अपने पति और ससुराल पक्ष के साथ रिश्ता ही नहीं बना पाती है। मायके वालों के दखल के कारण पहले दिन से ही वह ससुराल को अलग तरीके से देखती है। शादी के कई माहिनों बाद भी वह अपनी मां और मायके वालों से दिनभर फोन में जुड़ी रहती है।
अपनी मां के निर्देश पर ही वह काम करती है। जिसके कारण हजारों घर बसने के पहले ही बिखरने लगते है। पति-पत्नी के बीच तलाक की बात आ जाती है। तो वहीं कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौरान तलाक के लिए 50 फीसदी से ज्यादा मायके वालों के लगातार नियमित हस्तक्षेप के कारण रिश्तें टूटने की बात कही गई है। हर छोटी-बड़ी बात में मायके के लोग हस्तक्षेप करते है।