देश ने आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और उल्लास के साथ मनाया। कर्तव्य पथ पर द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और करीब 90 मिनट तक चली भव्य परेड की सलामी ली। इससे पहले राष्ट्रपति पारंपरिक बग्गी में मुख्य अतिथियों के साथ कर्तव्य पथ पहुंचीं, जहाँ राष्ट्रपति अंगरक्षक (PBG) ने उन्हें एस्कॉर्ट किया। 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई।
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष थीम पर सजी परेड
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की थीम ‘वंदे मातरम् के 150 साल’ रही, जिसकी झलक परेड के हर खंड में दिखाई दी। परेड में थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त शक्ति, स्वदेशी तकनीक और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी
इस वर्ष के मुख्य अतिथि यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता रहे। समारोह में एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन उपस्थित रहीं। दोनों नेताओं को सुबह गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। परेड में यूरोपीय यूनियन की सैन्य टुकड़ी भी शामिल हुई, जिसने भारत-ईयू रक्षा सहयोग की झलक प्रस्तुत की।
सेना की ताकत और परंपरा का प्रदर्शन
परेड में पहली बार आर्मी का फेज्ड बैटल एरे फॉर्मेट प्रस्तुत किया गया, जिसमें थल और वायु शक्ति का संयुक्त प्रदर्शन दिखा।
61वीं कैवेलरी का दस्ता अपनी पारंपरिक घुड़सवारी के साथ आकर्षण का केंद्र रहा। यह दुनिया की एकमात्र सक्रिय हॉर्स कैवेलरी रेजिमेंट है।
इंडियन नेवी की झांकी और मार्चिंग दस्ता भी परेड में शामिल रहा, जिसने तिरंगे को सलामी दी।
स्वदेशी तकनीक की झलक: HMRV
कर्तव्य पथ पर हाई मोबिलिटी रिकॉनिसेंस व्हीकल (HMRV) प्रदर्शित किया गया। यह भारत का पहला स्वदेशी आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल है, जिसे महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने विकसित किया है। इसमें बैटलफील्ड सर्विलांस रडार, ड्रोन सपोर्ट, एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम और एंटी-ड्रोन गन जैसी आधुनिक क्षमताएं मौजूद हैं।
वायुसेना का ‘सिंदूर फॉर्मेशन’
आसमान में इंडियन एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने सिंदूर फॉर्मेशन बनाकर शक्ति प्रदर्शन किया। इस फॉर्मेशन में राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर फाइटर जेट शामिल रहे। साथ ही एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टरों ने ध्वज फॉर्मेशन में उड़ान भरते हुए पुष्पवर्षा की, जिससे कर्तव्य पथ देशभक्ति के रंग में रंग उठा। पूरे समारोह के दौरान तालियों की गूंज और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच गणतंत्र दिवस की यह परेड भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त संदेश देती नजर आई।






