पन्ना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 और जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवाओं की हालत सवालों के घेरे में है। जिले में संचालित कई एम्बुलेंस घिसे हुए टायरों के सहारे सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार कई एम्बुलेंसों में स्टेपनी तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रास्ते में टायर पंचर होने की स्थिति में मरीजों और परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। हाल ही में एक एम्बुलेंस जंगल क्षेत्र में पंचर हो गई थी, जिससे मरीज और उसके परिजनों को करीब डेढ़ घंटे तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
गर्मी के मौसम में अधिकांश एम्बुलेंसों के एयर कंडीशनर (एसी) भी काम नहीं कर रहे हैं। इसका सीधा असर गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों पर पड़ रहा है, जिन्हें सफर के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
एम्बुलेंस संचालन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार जिले में कुल 34 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं, जिनमें से 5 वर्तमान में खराब हैं। केवल 29 एम्बुलेंस ही सेवाएं दे रही हैं, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

अजयगढ़ और पहाड़ीखेड़ा जैसे क्षेत्रों में एम्बुलेंस की उपलब्धता नहीं होने से आपात स्थिति में पन्ना मुख्यालय से वाहन भेजना पड़ता है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती है और गंभीर मामलों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस सेवाओं की खामियों के कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। नागरिकों ने प्रशासन से एम्बुलेंसों की स्थिति सुधारने, पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने और दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने की मांग की है।