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ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने जमकर निशाना साधा, बोले- सतीश खुद मायावती के बराबर नहीं बैठ सकते, ब्राह्मणों को क्या सम्मान दिलाएंगे

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी जातीय मामलों को मुद्दा बनाकर ब्राह्मण कार्ड खेलने के लिए सियासी पिच पर बैटिंग करने उतर गई है।

By: RNI Hindi Desk 
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ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने जमकर निशाना साधा, बोले- सतीश खुद मायावती के बराबर नहीं बैठ सकते, ब्राह्मणों को क्या सम्मान दिलाएंगे

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी जातीय मामलों को मुद्दा बनाकर ब्राह्मण कार्ड खेलने के लिए सियासी पिच पर बैटिंग करने उतर गई है। बहुजन समाज पार्टी अयोध्या में ब्राह्मण सम्मेलन के साथ विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक आगाज की है।  पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की अगुवाई में पार्टी ब्राह्मण को साधने में लगी है।

बहुजन समाज पार्टी के ब्राह्मण सियासत पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इन सम्मेलनों की अगुवाई करने वाले सतीश चंद्र मिश्रा खुद बसपा सुप्रीमो मायावती के बराबर में नहीं बैठ सकते। यह सभी ने चुनावी मंचों पर देखा है। ऐसे में वह ब्राह्मणों को बसपा में क्या सम्मान दिलाएंगे? उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अब साइकिल लेकर निकले हैं। कोरोना महामारी में तो बस घर में छिपे बैठे ट्वीट करते रहे, जबकि लोगों को मदद की दरकार थी। लोगों की मदद भाजपा ने की।

उन्होने कहा कि आज बसपा व सभी विपक्षी दल ब्राह्मणों को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं पर इससे पहले किसी ने उन्हें याद नहीं किया। याद करें जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है।

उन्होने विपक्ष के सभी नेताओं पर निशाना साधते हुए कह कि मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि कारसेवकों पर इसलिए गोलियां चलवाई कि ऐसा न करने से एक वर्ग विशेष नाराज हो जाता। मायावती ने सहारनपुर चुनावी रैली में भी कहा था कि मुस्लिमों एक हो जाओ। इन सब में  ब्राह्मण कहां थे। अब सब ड्रामेबाजी कर रहे हैं।

इसके साथ ही उन्होने कहा कि पूरी तरह गलत है कि भाजपा सरकार में ब्राह्मणों पर अत्याचार हुआ और वे नाराज हैं। यह चुनावी स्टंट ही तो है कि खुद को समाजवादी विचारधारा का बताने वाले आज लोहिया को छोड़कर भगवान परशुराम की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। उन्होने ब्राह्मणों पर सियासत को लेकर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है।

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