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देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की आज 136वीं जयंती, पीएम मोदी, राम नाथ कोविंद ने दी श्रद्धांजलि

By: RNI Hindi Desk 
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देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की आज 136वीं जयंती, पीएम मोदी, राम नाथ कोविंद ने दी श्रद्धांजलि

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज 136वीं जयंती है। बिहार के जन्मे राजेंद्र प्रसाद दलालु व निर्मल स्वभाव के व्यक्ति थे। उनका जन्म बिहार के भोजपुरा क्षेत्र के 1884 में एक छोटे से गांव में हुआ था। 26 जनवरी 1950 से 14 मई 1962 तक उन्होंने देश के राष्ट्रपति के तौर पर अपनी सेवा दी।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद जयंती के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और संविधान निर्माण में उन्हें अतुलनीय योगदान देने वाला बताया है।

पीएम मोदी ने ट्वीट करके लिखा पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें मेरी सादर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण में उन्होंने अतुलनीय भूमिका निभाई। सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर आधारित उनका जीवन देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, ‘पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें मेरी सादर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण में उन्होंने अतुलनीय भूमिका निभाई। सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर आधारित उनका जीवन देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।’

राम नाथ कोविंद ने ट्वीट करके लिखा, “राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उनकी जयंती पर भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ। राजेंद्र प्रसाद को पुष्पांजलि अर्पित की।”

आप को बता दे कि राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा बिहार के छपरा जिला स्कूल से हुई थीं। केवल 18 साल की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा प्रथम स्थान से पास की और फिर कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लेकर लॉ के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। वे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बंगाली एवं फारसी भाषा से पूरी तरह परिचित थे।

बताया जाता है कि राजेंद्र प्रसाद पढ़ाई में अव्वल रहा करते थे। कई बार उनकी कॉपी को देखकर शिक्षक दंग रह जाते थे। एक बार एक परीक्षक ने उनकी कॉपी में लिखा था, कि ये “परीक्षार्थी परीक्षक से बेहतर है।”

उनके बारे जो खास बात बतायी जाती है कि वो बेहद सादगी से अपनी जीवन काटना पसंद करते थे. वक्त से सोना, वक्त पर उठना उनके लिए बहुत जरूरी हुआ करता था।
उन्होंने साल 1915 में लॉ में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की थी।

कहा जाता है कि उनके जीवन पर उनके गुरु गोपाल कष्ण गोखले के विचार और महात्मा गांधी ने गहरा प्रभाव डाला था। उन्होंने अपनी आत्मकथा में इस बात का जिक्र भी किया था कि उन्होंने गोपाल कृष्णा से मिलने के बाद आजादी की लड़ाई में शामिल होने का फैसला किया था।

जिसके बाद वो परिवार की रजामंदी लेकर स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल हुए। बताया जाता है कि महात्मा गांधी खुद राजेंद्र प्रसाद के निर्मल स्वभाव व उनकी योग्यता को लेकर काफी प्रसन्न हुए थे।

राजेंद्र प्रसाद जी का नेहरू के साथ मतभेद रहा है। बताया जाता है कि कि साल 1947 में सोमनाथ मंदिर के जोर्णोद्धार का फैसला आया था। जिसका कार्य सन्न 1951 में पूरा कर लिया गया था।

जिसके बाद उद्घाटन समारोह में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बुलाया गया था। लेकिन पंडित नेहरू नहीं चाहते थे कि वो वहां जाये। उनका कहना था कि राष्ट्रपति के वहां जाने से लोगों के बीच गलत संदेश जायेगा। लेकिन इसके बावजूद राजेंद्र प्रसाद उद्घाटन में शामिल हुए।

1962 में जब उन्होंने राष्ट्रपति के पद से अवकाश लिया तो भारत सरकार ने उन्हें ‘भारत रत्न’ की उपाधि से सम्मानित किया था। 28 फरवरी 1963 को उनका निधन हो गया। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनी रहती थी, जो हर किसी को मोहित कर लेती थी। डॉ. प्रसाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक से अधिक बार अध्यक्ष रहे।

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