एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रचार कर रही है, वहीं पन्ना जिले की ग्राम पंचायत बड़गाडी के ग्राम नई बस्ती पुखर में हालात कुछ और ही तस्वीर बयां कर रहे हैं। यहां रहने वाले आदिवासी परिवार आज भी पीने के पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
गांव में चार हैंडपंप और चार कुएं मौजूद हैं, लेकिन जलस्तर लगातार नीचे जाने के कारण इनमें से अधिकांश जलस्रोत अनुपयोगी हो चुके हैं। कई कुओं में पानी पूरी तरह सूख चुका है, जबकि कुछ में मौजूद पानी दूषित और उपयोग के योग्य नहीं बताया जा रहा है।

पेयजल संकट का सबसे अधिक असर ग्रामीण महिलाओं पर पड़ रहा है। उन्हें भीषण गर्मी के बीच लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित एक निजी बोरवेल से पानी लाना पड़ रहा है। सिर पर बर्तन रखकर लंबी दूरी तय करना ग्रामीणों की रोजमर्रा की मजबूरी बन गया है।
ग्राम पंचायत स्तर पर समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन नए बोरवेल की स्वीकृति प्रशासनिक प्रक्रिया में अटकी हुई है। पंचायत सचिव विजयकांत पांडे के अनुसार क्षेत्र में जलस्तर काफी नीचे चला गया है और बिना सक्षम अनुमति के नया बोरिंग कराना संभव नहीं है। फिलहाल पुराने जलस्रोतों की सफाई और सुधार का कार्य किया जा रहा है।

लगातार बनी हुई जल समस्या से परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधान किया जाए ताकि उन्हें रोजाना पानी के लिए संघर्ष न करना पड़े।

नई बस्ती के लोगों ने पन्ना कलेक्टर से जल्द प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता की पूर्ति के बिना ग्रामीण जीवन प्रभावित हो रहा है और तत्काल राहत की जरूरत है।