रिपोर्ट: सत्यम दुबे
वाराणसी: कोरोना के दूसरे लहर के कहर ने कई हंसते खेलते परिवारों के तबाह कर दिया है। ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से कोरोना से संक्रमित लोग लगातार दम तोड़ रहे हैं। कोरोना के हाहाकार से देश का कोई भी अछूता नहीं रहा, सभी राज्यों कोरोना की मार झेली है। हालात ये हो गये हैं कि मरनेवालों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई कि लोग शव को जलाने की बजाय गंगा में बहाने लगे हैं। गंगा में शवों को बहाने का मामला सामने आने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोगो से अपील की है, कि लोग गंगा नदी में इस तरह शव न बहायें। इसके साथ ही उन्होने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि गंगा में शव बहाने से रोका जाय।
इसके बाद भी अब चंदौली, बनारस और भदोही में भी 17 शव गंगा में बहते मिले हैं। शवों को निकालकर गंगा किनारे ही गड्ढा खोदकर गाड़ दिया गया है। गंगा में तैरते शवों के मिलने से आसपास के लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका से दहशत का माहौल है। चंदौली के धानापुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बड़ौरा गांव के सामने गुरुवार सुबह गंगा नदी में आठ शव मिलने से सनसनी फैल गई। सभी शवों के लगभग एक सप्ताह पुराना होने की संभावना जताई गई है।
शवों के गंगा में बहने की सूचना मिलते ही ज्वाइंट मजिस्ट्रेट समेत कई अधिकारी पुलिस टीम के साथ पहुंचे और सभी शवों को गंगा किनारे ही जेसीबी से गड्ढा खोदवाकर दफन कराया गया। वहीं दूसरी ओर वाराणसी में दोपहर बाद गंगा उस पार सूजाबाद क्षेत्र में सात शव दिखाई दिये। पड़ोसी जिले गाजीपुर और चंदौली में शव मिलने के बाद यहां पहले से ही गंगा किनारे लेखपालों की एक टीम लगाई गई थी। गुरुवार दोपहर राजघाट पुल के नीचे पहला शव दिखा।
पहला शव दिखाई देने के बाद गंगा किनारे खोज करने पर एक के बाद एक सात शव मिले। इसमें पांच शव पुरुष और दो शव महिलाओं के निकले। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी शवों को बाहर निकाला और गंगा किनारे रेत पर ही दो बड़े गड्ढे बनाकर शवों को नमक के साथ दफन किया गया। वहीं भदोही के गोपीगंज रामपुर गंगा घाट पर गुरुवार को दो शव बहते देखे गए। जब तक प्रशासन उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करता, शव बहकर दूर चले गए। यहां दो दिन पहले भी चार शव बहते देखे गए थे।
सरकार और प्रशासन के तमाम प्रयास के बाद भी गंगा में शवों के बहाने का सिलसिला लगातार जारी है, गंगा किनारे बसे गांवो में लोग हदशत में हैं।