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जीवन का सबसे बड़ा अज्ञान मोह है, अगर जीवन में ज्ञान नहीं है तो कुछ नहीं है ! पढ़े

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आम तौर पर हर व्यक्ति आज आपसे यह कहता हुआ दिखाई देता है की वो दुःखी है। आप यह सोचते है की आखिर ऐसा क्यों है ? ऐसा क्यों होता है की एक व्यक्ति के पास धन, सम्पदा , नौकरी सब है उसके बाद भी क्यों दुःखी है ? दरअसल इसका सबसे बड़ा कारण है मोह !

अगर आप इस बात को गहराई से समझेंगे तो पाएंगे की जीवन में मोह से बड़ा कोई अज्ञान नहीं है। जो व्यक्ति मोह में जीता है वो किसी और की सलाह को ना ही सुन सकता है और ना ही समझ सकता है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाभारत में मिलता है। धृतराष्ट्र को दुर्योधन से बहुत प्रेम था लेकिन वो कब मोह में बदल गया उन्हें समझ ही नहीं आया। इस मोह की वजह से उन्हें दुर्योधन का कोई भी कार्य बुरा नहीं लगा।

लाक्षागृह में पांडवों को जलाकर मारने की कोशिश हुई लेकिन उसे भी माफ़ कर दिया गया। वो इतने मोह में थे की अपने पुत्र की कोई गलती देख ही नहीं पा रहे थे और जब भी कोई समझाने की कोशिश करता तो वो कहते की तुम्हे मेरे पुत्र में ही खोट दिखाई देता है।

दरअसल यही मोह है और यही अज्ञान है ! जब भी मोह होता है तो सबसे पहले वो बुद्धि का नाश करता है। अच्छा बुरा सोचने की शक्ति को खत्म करता है। इसी अज्ञान की वजह से द्रोपदी को भरी सभा में नग्न करने की कोशिश हुई।

उस समय भी वो अपने पुत्र को रोक सकते थे लेकिन नहीं रोक पाए। जब कृष्ण शांति दूत बनकर आये तो दुर्योधन उन्हें ही बांधने चला, उस समय भी उन्होंने दुर्योधन को ये नहीं समझाया की यशोदा नंदन को कौन बांध सकता है ?

इसी मोह और अज्ञान के कारण सब खत्म हो गया। इसलिए ही श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा की मोह सबसे पहले ज्ञान को नष्ट करता है। मोह ही जीवन की सबसे बड़ी समस्या है जिसके कारण इंसान दुःखी होकर इधर उधर भटक रहा है।

मोह किसी भी प्रकार का हो सकता है और ये सुखी दुःखी सब करता है ,जैसे आपको अपनी कुर्सी का मोह है। अगर वो आपके पास रहती है तो आप सुखी है लेकिन कोई और आकर उस कुर्सी पर बैठ गया तो आप दुःखी हो जाएंगे।

कृष्ण ने यही समझाया है की मोह रहित मनुष्य ही मुझे प्राप्त कर सकता है। आनंद में सिर्फ वही रहेगा जिसका मोह नष्ट हो गया है ! जब अम्बा अम्बालिका के पति का देहांत हुआ तो सत्यवती ने गंगा पुत्र भीष्म को उनसे विवाह करके पुत्र उत्पन्न करने के लिए कहा था।

लेकिन वो तो प्रतिज्ञा ले चुके थे की विवाह नहीं करेंगे ! संतान पैदा नहीं करेंगे लेकिन देखा जाए तो जिन सत्यवती के पुत्रों के लिए उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी वो तो अब जीवित ही नहीं थे तो ऐसे में वो विवाह कर भी लेते तो क्या अनर्थ हो जाता ?

उसके बाद भी उन्होंने वो विवाह नहीं किया क्यूंकि उन्हें कोई मोह नहीं था ! ना धन से ना राज्य से, वो तो सिर्फ अपनी माँ को दिए वचन के कारण हस्तिनापुर के सिंहासन की सुरक्षा कर रहे थे।

इसलिए जीवन में किसी भी मोह को मत आने दो, ये मोह ही सभी दुखों का कारण है ! जो करना है स्थिर होकर करो और ईश्वर को समर्पित होकर करो !

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