रिपोर्ट- पल्लवी त्रिपाठी
नई दिल्ली : मुस्लिमों का पर्व रमजान काफी नज़दीक है, इस महीने को मुसलमानों के लिए बेहद पाक माना जाता है। लेकिन इस बीच लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। उनका मानना है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाने से रोजा टूट जाएगा? हालांकि, सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती ने इस सवाल के लेकर बयान दिया है । जिससे लोगों के मन में संशय कुछ हद तक खत्म होता नज़र आ रहा है। सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि रोजे के दौरान वैक्सीन लगवाने से उनका रोजा नहीं टूटेगा ।
अरब न्यूज में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, रमजान के पहले सऊदी के शेख अब्दुल अजीज अल-अशेख ने बताया कि रोजा करते समय कोरोना वायरस वैक्सीन लेना रोजा को अमान्य नहीं करता है। उन्होंने कहा, ‘कोरोना वायरस वैक्सीन से रोजा रखने वाले व्यक्ति का रोजा नहीं टूटेगा, क्योंकि यह खाना या ड्रिंक नहीं माना जाता है । वैक्सीन को शरीर के अंदर लगाया जाता है, इसलिए इससे रोजा नहीं टूटेगा ।’
वहीं, मुस्लिमों के बीच इस बात को लेकर भी संशय है कि क्या कोरोना की वैक्सीन में पोर्क यानी सुअर के मांस का इस्तेमाल किया गया है? हालांकि, इस संशय को दूर करते हुए एस्ट्राजेनेका ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके कोविड-19 के टीके में पोर्क के किसी अंश का इस्तेमाल नहीं किया गया है। एस्ट्राजेनेका ने कहा कि मुसलमानों को इस संबंध में थोड़ी भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।
बता दें कि दुनिया में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया ने वैक्सीन में पोर्क होने का दावा किया था । इतना ही नहीं उलेमा काउंसिल ने बीते शुक्रवार को अपनी वेबसाइट पर टीके को हराम करार देकर इंडोनेशियाई मुसलमानों से इसका इस्तेमाल न करने की अपील भी की थी । काउंसिल का कहना है कि वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में ट्रिप्सिन का इस्तेमाल किया जाता है, जो सुअर के पैनक्रियाज से जुड़ा है।
हालांकि, एस्ट्राजेनेका ने इस मामले पर सफाई पेश की । कंपनी का कहना है कि उसकी कोरोना वैक्सीन में किसी भी तरह के सुअर के मांस का अंश शामिल नहीं है।