सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में फैसला देने वाले पूर्व जज एसके यादव की सुरक्षा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने जज सुरेंद्र कुमार यादव को सुरक्षा दी थी। साथ ही उनका कार्यकाल भी फैसला सुनाने तक बढ़ा दिया था।
जज सुरेंद्र कुमार यादव ने बाबरी विध्वंस मामले में बीजेपी नेताओं समेत सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया था। इस मामले में एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत कई बड़े नेता आरोपी थे।
अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद लगातार सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जा सकती। लखनऊ स्पेशल कोर्ट के जज सुरेंद्र कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सुरक्षा का मांग की थी। जज यादव ने अपने आखिरी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपनी निजी सुरक्षा जारी रखने के लिए कहा है।
इससे पहले ट्रायल के दौरान जज ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मुहैया करने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। अदालत ने यूपी सरकार को सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे।
हालांकि फैसला आने और रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जज को सुरक्षा जारी रखने से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि बाबरी विध्वंस मामले में यह फैसला घटना के करीब 28 साल बाद 30 सितंबर 2020 को आया था।
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले का ट्रायल करने वाले स्पेशल जज एस के यादव पिछले साल 30 सितंबर को ही रिटायर होने वाले थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनका कार्यकाल फैसला आगे बढ़ाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 में दो साल के भीतर मुकदमा निपटा कर फैसला सुनाने का आदेश दिया था।
इसके बाद तीन बार समय बढ़ाया और अंतिम तिथि 30 सितंबर 2020 तय की थी। घटना की पहली FIR नंबर 197 उसी दिन 6 दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्मभूमि सदर फैजाबाद पुलिस थाने के थानाध्यक्ष प्रियंबदा नाथ शुक्ल ने दर्ज कराई थी। दूसरी FIR नंबर 198 राम जन्मभूमि पुलिस चौकी के प्रभारी गंगा प्रसाद तिवारी की थी।
इस केस की सुनवाई के लिए जज सुरेंद्र कुमार यादव को सिर्फ सेवा विस्तार ही नहीं मिला बल्कि इस मामले के चलते उनका तबादला भी रद्द किया गया। दरअसल, सुरेंद्र कुमार एडीजे के तौर पर मामले की सुनवाई कर रहे थे तो उन्हें प्रमोट कर जिला जज बनाते हुए उनका तबादला बदायूं कर दिया गया।
जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र यादव का तबादला रद्द कर दिया था।