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बुधनी में जनगणना और मकान सूचीकरण कार्य पर उठे सवाल, नागरिकों ने जताई नाराजगी

सीहोर जिले के बुधनी नगर में चल रहे जनगणना और मकान सूचीकरण कार्य को लेकर कुछ नागरिकों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप है कि कई मकानों पर अब तक नंबरिंग नहीं हुई है और कुछ स्थानों पर निर्धारित जानकारी भी पूरी तरह एकत्र नहीं की गई। स्थानीय लोगों ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और त्रुटियों के निष्पक्ष सत्यापन की मांग की है। फिलहाल मामले में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

By: Nivedita 
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बुधनी में जनगणना और मकान सूचीकरण कार्य पर उठे सवाल, नागरिकों ने जताई नाराजगी

सीहोर जिले के बुधनी नगर में चल रहे जनगणना एवं मकान सूचीकरण कार्य को लेकर कुछ नागरिकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि कई मकानों पर अब तक निर्धारित नंबर अंकित नहीं किए गए हैं, जबकि आसपास के अन्य घरों का चिन्हांकन पूरा हो चुका है। इससे प्रभावित परिवारों में असंतोष देखा जा रहा है।

जानकारी संग्रहण की प्रक्रिया पर भी उठे प्रश्न

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले सभी निर्धारित प्रश्न कई स्थानों पर नहीं पूछे जा रहे हैं। कुछ नागरिकों का दावा है कि प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर पूरी जानकारी लेने के बजाय सीमित जानकारी के आधार पर ही विवरण दर्ज किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

वार्ड क्रमांक 10 से भी सामने आई शिकायत

जानकारी के अनुसार बुधनी घाट क्षेत्र स्थित वार्ड क्रमांक 10 में भी मकान सूचीकरण और नंबरिंग को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट जवाब या समाधान नहीं मिला है।

जनगणना में सटीक आंकड़ों का महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना और मकान सूचीकरण जैसे कार्यों में प्रत्येक मकान और परिवार का सही रिकॉर्ड होना बेहद आवश्यक है। इसी आधार पर भविष्य की योजनाएं, सरकारी सुविधाएं और विकास कार्यों का खाका तैयार किया जाता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की त्रुटि या चूक को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

शिकायतों के निराकरण की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कहीं कोई त्रुटि हुई है तो उसका निष्पक्ष सत्यापन कर आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जनगणना प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ संपन्न होनी चाहिए, ताकि कोई भी परिवार या मकान सूचीकरण से वंचित न रहे।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार

सूत्रों के अनुसार कुछ शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों के निराकरण में हो रही देरी से नाराज हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपनी बात वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के साथ सार्वजनिक रूप से भी मुद्दा उठाने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है और मामले की स्थिति शिकायतों एवं स्थानीय चर्चाओं तक सीमित है।

जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति

जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

रिपोर्ट – कन्हैया नाथ 

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