Home दिल्ली जिनके लिए कभी जेल गयी Sheela Dixit, उन्हीं के चलते खत्म हुआ राजनीतिक करियर

जिनके लिए कभी जेल गयी Sheela Dixit, उन्हीं के चलते खत्म हुआ राजनीतिक करियर

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रिपोर्ट- पल्लवी त्रिपाठी

नई दिल्ली : शीला दीक्षित, जिन्होंने सबसे लंबे समय तक दिल्ली की मुख्यमंत्री का इतिहास रचा । लेकिन उनके जीवन से जुड़ी एक और ऐसी घटना है, जिसे विडंबना भरा इतिहास के रूप में याद किया जा सकता है । आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहे हैं । जिसमें शीला दीक्षित जिन लोगों के लिए जेल गयी, एक वक्त आया, जब उनका सियासी करियर उन्ही की वजह से खत्म हो गया ।

कांग्रेस की सीनियर नेता शीला दीक्षित राजधानी दिल्ली की तीन बार (1998-2013) मुख्यमंत्री रह चुकी है । उन्हें अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले । दीक्षित ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रहते हुए कई कीर्तीमान स्थापित किए । दिल्ली में पहले फ्लाईओवर का आधार, मेट्रो, सीएनजी आदि का श्रेय दीक्षित को ही जाता है । हालांकि, इन उपलब्धियों के बीच कुछ ऐसा हुआ कि उनके किए कराए पर पानी फिर गया । शीला दीक्षित साल 2019 में दुनिया से रुकसत हो गयी ।

शीला दीक्षित के राजनीतिक जीवन की यह घटना बेहद अहम मानी जाती है । दरअसल, सन् 1990 में जब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव सरकार थी, तब उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों के खिलाफ ​आंदोलन छेड़ा था । जिसके चलते उन्हें 82 अन्य लोगों के साथ 23 दिनों के लिए जेल में डाल दिया गया था ।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों के विरोध में आंदोलन छेड़ने वाली दीक्षित के कार्यकाल में साल 2012 में दिल्ली का बेहद चर्चित गैंगरेप कांड हुआ । इस कांड के बाद शीला दीक्षित के राजनीतिक जीवन में उथल- पुथल मच गया । इतना ही नहीं, घटना के चलते दीक्षित के हाथों से सत्ता चली गई ।

वहीं, बात करें उनके जीवन और राजनीतिक सफर की तो बता दें कि शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था । शीला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में एमए किया । 1962 में उनकी शादी आईएएस अफसर विनोद दीक्षित से हुई, जो पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे ।

जिसके बाद ससुर उमाशंकर दीक्षित की छत्रछाया में ही शीला सन् 1984 में उत्तर प्रदेश के कन्नौज संसदीय क्षेत्र से संसद पहुंची । जिस दौरान दीक्षित ने संयुक्त राष्ट्र के महिलाओं को लेकर कमीशन में भारत का प्रतिनिधित्व किया । 1986 से 89 तक केंद्रीय राज्य मंत्री के पद पर रही ।

हालांकि, सन् 1998 के संसदीय चुनाव में उन्हें पूर्व दिल्ली क्षेत्र से भाजपा के लालबिहारी तिवारी ने करारी शिकस्त दी । इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें राज्य की राजनीति का चेहरा बनाया । और फिर उन्होंने गोल मार्केट सीट से विधानसभा चुनाव जीता और 1998 में ही दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं । हालांकि, इस दौरान शीला दीक्षित कई विवादों से घिरी रही ।

साल 2012 में दिल्ली में निर्भया कांड हुआ, जिसने दीक्षित सरकार को हिलाकर रख दिया और सत्ता छोड़ने को मजबूर कर दिया । जिसके बाद 2013 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने । इस घटना को दीक्षित के राजनीतिक जीवन का मोड़ माना जाता है ।

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