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मीना जाटव ने विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में हासिल किया प्रथम स्थान, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने गोल्ड मेडल से किया सम्मानित

राज्यपाल ने मीना जाटव को स्वर्ण पदक पहनाया और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया, वहीं मुख्यमंत्री ने उनकी इस शैक्षणिक उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बताया।

By: Naredra 
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मीना जाटव ने विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में हासिल किया प्रथम स्थान, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने गोल्ड मेडल से किया सम्मानित

​शाजापुर की बेटी मीना जाटव ने नया कीर्तिमान स्थापित किया।  मीना ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से एम.ए. हिंदी साहित्य में प्रथम स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक और उपाधि से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिया।

​उज्जैन के कालिदास अकादमी संकुल में आयोजित इस गरिमामय समारोह में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति और शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी में मीना जाटव को मंच पर आमंत्रित किया गया। राज्यपाल ने उन्हें स्वर्ण पदक पहनाया और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया, वहीं मुख्यमंत्री ने उनकी इस शैक्षणिक उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बताया।

श्रीमती मीना जाटव स्थानीय बालकृष्ण शर्मा नवीन (बी.के.एस.एन.) स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शाजापुर की नियमित छात्रा रही हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर हिंदी साहित्य की जटिलताओं को न केवल समझा, बल्कि एम.ए. की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से कॉलेज प्रबंधन और सहपाठियों में खुशी की लहर है।

गौरतलब है कि ​एक विवाहित महिला के रूप में घरेलू जिम्मेदारियों को निभाते हुए उच्च शिक्षा में स्वर्ण पदक प्राप्त करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। मीना जाटव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पति जसवंत जाटव और परिवार के निरंतर सहयोग को दिया है। उन्होंने बताया कि परिवार के प्रोत्साहन और कॉलेज के प्राध्यापकों के मार्गदर्शन के बिना यह मुकाम पाना कठिन था। उन्होंने कहा कि ​”साहित्य केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि जीवन की संवेदनाओं का दर्पण है। उन्हें खुशी है कि वो अपनी संस्कृति और भाषा के प्रति अपने प्रेम को इस सम्मान के जरिए व्यक्त कर सकी। ​​

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