कर्नाटक के प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और कन्नड़ कवि बन्नंजय गोविंदाचार्य का रविवार को उडुपी में निधन हो गया है। वह 85 साल के थे।बताया जाता है कि गोविंदाचार्य का निधन उडुपी के अंबालापडी में उनके घर पर उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि साहित्य में उनके महान योगदान के लिए हमेशा उन्हें याद किया जाएगा। गोविंदाचार्य ने कर्नाटक के उडुपी जिले में अंबालपैडी स्थित अपने आवास पर रविवार सुबह आखिरी सांस ली।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘विद्यावाचस्पति बन्नंजय गोविंदाचार्य जी को साहित्य में उनके महान योगदान के लिए याद किया जाएगा। संस्कृत और कन्नड़ के प्रति उनका जुनून सराहनीय था।”
Vidyavachaspati Bannanje Govindacharya Ji will be remembered for his great contributions to literature. His passion towards Sanskrit and Kannada were admirable. His works will continue influencing the future generations. Pained by his demise. Condolences to his family. Om Shanti.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 13, 2020
उनके निधन पर शोक जताते हुए मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने ट्वीट किया कि वेद और पुराण पर उनके कार्य और प्रवचन धार्मिक चेतना को जागृत कर रहे थे। उन्होंने कई संस्कृत और कन्नड़ ग्रंथ लिखे थे। मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।
‘मधवा’ विचारधारा के प्रचारक गोविंदाचार्य को वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने वेद सुक्तों, उपनिषदों, ब्रह्म सूत्र और गीता पर टीकाओं के साथ ही लगभग 150 पुस्तकें लिखी थीं और कई पुस्तकों का संस्कृत से कन्नड़ में अनुवाद भी किया था।
अमेरिका के प्रिंस्टन में 1979 में धर्म और शांति पर आयोजित विश्व सम्मेलन में वह भारत के ब्रांड एंबेसडर थे। वर्ष 1936 में जन्मे गोविंदाचार्य वेद भाष्य, उपनिषद भाष्य, महाकाव्य महाभारत, रामायण और पुराणों में पारंगत थे।
अपने लंबे करियर के दौरान गोविंदाचार्य ने वेद सूक्तों, शत रुद्रियों, ब्रह्मसूत्र भाष्य और गीता पर भाष्य लिखे। गोविंदाचार्य एक महान वक्ता भी थे और उन्होंने प्राचीन संस्कृत दार्शनिक पाणिनि द्वारा लिखित नए व्याकरण सूत्र पर लिखा था।