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रायगढ़ : भारी बारिश के बाद भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 47, CM उद्धव ने प्रभावित इलाकों का किया दौरा, मुआवज़े की घोषणा भी की

महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से हुई भारी बारिश ने तबाही मचा रखा है, जिसमें अब तक 135 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं रायगढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 44 से 47 हो गई। वहीं राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे ने प्रभावित इलाके का दौरा किया और तबाही का जायजा लिया।

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से हुई भारी बारिश ने तबाही मचा रखा है, जिसमें अब तक 135 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं रायगढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 44 से 47 हो गई। वहीं राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे ने प्रभावित इलाके का दौरा किया और तबाही का जायजा लिया। रायगढ़ में महाड़ के तलिये गांव में पहुंचे सीएम ने कहा कि बाढ़ से जिन लोगों को नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। हम कोशिश करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाओं में किसी की जान न जाए।

पीएम मोदी ने किया राहत का ऐलान

बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के रायगढ़ में भूस्खलन से हुई लोगों की मौत पर गहरा दुख जताया है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि, ‘महाराष्ट्र के रायगढ़ में भूस्खलन से हुई लोगों की मौत से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। महाराष्ट्र में भारी बारिश के कारण स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों को सहायता मुहैया कराई जा रही है।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान करने की घोषणा भी की है।

रायगढ़ में मरने वालों की संख्या 47 हुई

बता दें कि बाढ़ प्रभावित रायगढ़ में एनडीआरएफ की टीम राहत और बचाव कार्य में लगी हैं। रायगढ़ में पहाड़ दरकने के बाद से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। कई और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।

सतारा में भी पहाड़ दरका

महाराष्ट्र के सतारा में भी पहाड़ दरकने से हादसा हो गया। अब तक छह लोगों के शव निकाले जा चुके हैं। वहीं सतारा में शनिवार सुबह भी बारिश हुई। कोयना डैम से 53 हजार क्यूसेक लीटर पानी छोड़ा गया। इसकी वजह से आसपास के गावों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

ज्यादातर प्रभावित क्षेत्रों में पानी का स्तर बड़ी मात्रा में घट गया है लेकिन बाढ़ से अत्यधिक क्षति हुई है। घरों और सड़कों पर मिट्टी का ढेर जमा हो गया है। बाढ़ के बाद प्रशासन के पास एक बड़ी चुनौती यह है कि प्रभावित लोगों तक पेयजल, भोजन और दवाएं कैसे पहुंचाई जाएं। एनडीआरएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “कई स्कूलों और कुछ निजी संपत्तियों का आश्रय के रूप में और घायलों के वास्ते प्राथमिक उपचार केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया।”

बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलधार बारिश राज्य के लोगों पर मुसीबत बनकर टूटी है। इसके चलते पिछले दो दिनों में 135 लोगों को जान गंवानी पड़ी है। पिछले 24 घंटों में रायगढ़, रत्नागिरी और सतारा में हुई इन घटनाओं में कई लोग अब भी मलबे में दबे हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के अलावा नौसेना ने भी मोर्चा संभाल रखा है।

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